Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

जनवादी कवि विनोद शंकर की कविताएं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 19, 2023
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पूरा जेठ तप रहा है
लू भी चल रहा है
ऐसे समय में कोई भी नही
निकलना चाहेगा अपने घर से
अगर निकलेगा भी तो
पूरी तैयारी के साथ की
कही धूप न लग जाएं
कही लू न लग जाएं

पर पठारों पर ऐसा नहीं है
जहां भी जंगल है
वहां जंगल दान कर रहा है
इस वर्ष का संचित अपना धन
लुटा रहा है
दोनों हाथों से अपना यौवन

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

यहां भले ही इसकी कीमत कुछ भी हो
बाहर में बिकेगा दोगुने-चौगुने दामों पर यह रकम
यहां इसी को संग्रह करने की होड़ मची है
पूरा गांव के गांव इसी में लगा है
जितना हो सके महुआ, पियार, तेंदू-पत्ता
बटोरने में जुटा है
जो हमारा सदियों से जन्मसिद्ध अधिकार रहा है

कुछ वर्षों से इसी पर लगी है सरकार की नजर
कि इससे जंगल बर्बाद हो रहा है
वनों का क्षेत्रफल घट रहा है
इसलिए लगा दिया गया है
वन उत्पादों पर प्रतिबंध
वनों के सीमाओं को कर दिया गया है सिल
कि कोई भी वन उत्पाद बाहर न जाने पाएं
भले ही वह जंगल में ही क्यूं न सड़ जाएं !

पर हम इसे ऐसे ही बर्बाद थोड़े न होने देंगे
जितना हो सकेगा अपने आजीविका के लिए
इसका उपयोग करेंगे

इसके लिये सरकार चाहे हमें
जो भी कहे नक्सली या माओवादी
हम अपने अधिकारों के लिए
हमेशा लड़े हैं और लडेंगे
ऐसे कानूनों को हमेशा तोडेंगे
क्योंकि हमें पता है
जंगल हमारा है
और हम जंगल के हैं
तभी तो इस सदी में भी
जंगल में ही रमे है !

गुहार

मेरी मां कहती है
जिस दिन मैं पैदा हुआ
उस दिन बहुत दिनों के बाद
बहुत ज़ोर की बारिश हुई
बहुत दिनों के बाद
हमारे खेतों और जंगलों में हरियाली आई
मेरे जन्म लेने के साथ ही
बहुत सारे पौधों ने भी जन्म लिया
मेरी दादी और चाची ने
मेरे साथ-साथ इन नवजात
पौधों के लिए भी सोहर गाई !

जब मैं अपने छोटे-छोटे कदमों से चलने लगा
अपनी तोतली भाषा में ही
सबसे रिश्ते के अनुसार बोलने लगा
तो मां ने भैया-दीदी, चाचा–चाची
और दादा-दादी के साथ साथ
इन छोटे-छोटे पौधों से भी
मेरा परिचय कराई
कि कौन आम का पौधा है ?
कौन अमरूद का पौधा है ?
और कौन महुआ का पौधा है ?
ये मुझे बताई !
जिनके कोमल पत्तों को छु कर
पतली टहनियों को चूम कर
मुझे उन्हें प्यार करना सिखायी !

यही नहीं वहां स्थित
सारे छोटे-बड़े पेड़ों के बारे में बताई
कि किसे मेरे दादा ने
किसे मेरे परदादा ने है लगाई
जब भी मैं इनके फल खाता
इनके पत्तों और फूलों के साथ खेलता
तो हमेशा महसूस करता
ये सब है मेरे भाई
और कब मैं प्यार से इन्हे
अपना साथी अपना दोस्त
कह कर पुकारने लगा
खुद मुझे समझ नहीं आई !

आज जब इन सब पर है संकट आया
तो हमें लग रहा है कि हम पर है संकट आया
हमारे लिए ये पेड़ नहीं साथी है
हमारे जीवन के लिए
दीपक और बाती है
इन पेड़ों के साथ खड़ा होना
हवा के साथ खड़ा होना है
पानी के साथ खड़ा होना है
मिट्टी के साथ खड़ा होना है
और इन सब के साथ खड़ा होना है
जीवन के साथ खड़ा होना है.

जो समझते हैं
हम सिर्फ अपने जल–जंगल और
जमीन के लिए लड़ रहे हैं
उन्हें हम बता देना चाहते हैं
हम जीवन के लिए लड़ रहे है
जो धरती पर दिन पर दिन
सिमटती जा रही है
विलुप्त होते पशु–पक्षियों से
हमें ऐसा ही लग रहा है.

हम सुन रहे हैं उनकी चीखें
महसूस कर रहे हैं उनका दर्द
जो उसी हवा और पानी को पीकर
मिटते जा रहे हैं
जो उन्हें जीवन देती थी
ऐसे विलुप्त होते जा रहे हैं
जैसे ये धरती उनके रहने लायक
कभी थी ही नहीं !

पर हमने देखा था
उनका आकाश में खूब अटखेलिया करना
हमने देखा था
उनका पानी में जी भर कर मस्ती करना
हमने देखा था
उनका दूर देश से उड़ कर आना
और फिर वापस चला जाना
इसलिए हम से नहीं देखा जा रहा है
उनका इस तरह मरना
हमसे नहीं देखा जा रहा है
हवा का इस तरह बदलना
कि उसमें सांस लेना तक दूभर हो जाय
हमसे नहीं देखा जा रहा है
पानी और मिट्टी में जहर घुलना
कि बंजर हो जाय !

हमारी लड़ाई आज
इन सबकी लड़ाई हो चुकी है
सागर और हिमालय तक ने
गुहार लगाई है
जिसे सुना है हमने
अपने खेतों में काम करते हुए
जंगल में महुआ बिनते हुए
नदी में मछली पकडते हुए !

जनता

जनता को दोष कभी मत दो
गाली तो बिल्कुल भी नहीं
अगर तुम ऐसा करते हो
तो अपनी ही कमजोरियों पर पर्दा डाल रहे होते हो
जितना तुम्हें राजनीतिक सिद्धांत और
विचार जानने का अवसर मिला
उसका एक छोटा सा हिस्सा भी
जनता को मिला होता
तो उन्होंने कब की दुनिया बदल दी होती

जब भी कोई जनता को गाली देता है
तो मुझे लगता है या तो वो मूर्ख है या नासमझ
जिसे जनता के बारे में कुछ भी पता नहीं है

अगर उसे पता होता
तो वह हर पल जनता का ऐहसानमंद होता
और उसके लिए कुछ भी करने के संकल्प से भरा होता
या कुछ न कर पाने के दुःख से दुःखी होता

पर ये कौन लोग है ?
जिनके जीवन में किसी चीज का अभाव नहीं
जिनका घर-आंगन दुनिया भर के
सुख-सुविधाओं से भरा हुआ है
जो सत्ता के नाभीनाल से जुड़े हुएं हैं

जिनका एक ही काम है
जनता को मूर्ख और सत्ता को अपराजय बताना
और खुद को प्रगतिशील दिखलाने के लिये
विचारों से खेलना
और अपने को ऐसे दिखाना जैसे
दुनिया का सारा ज्ञान तो सिर्फ़
इन्हीं के पास है

आज जनता पर खुद से ज्यादा प्यार
और भरोसा करने का समय है
उनके लोहे के दुर्ग में जितनी जल्दी हो सके
शरण ले लेने का समय है
और ऐसा वही कर सकते हैं
जो सच में जनता से प्यार करते हैं
और उनके लिये कुछ भी कुर्बान कर
देने के लिये हमेशा तैयार रहते हैं
जनता भी आज उन्हीं को खोज रही है
जो जनता को मूर्ख और जाहिल नही समझते है !

  • विनोद शंकर

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आदमखोर

Next Post

फेसबुक और व्हाट्सएप को बनाएं क्रांतिकारी परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

फेसबुक और व्हाट्सएप को बनाएं क्रांतिकारी परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कौन है नरेन्द्र मोदी के अनुदार पितृसत्ता की हिमायती औरतें ?

April 19, 2022

विकास का दावा और कुपोषण तथा भूख से मरते लोग

October 4, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.