Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

‘लो मैं जीत गया…’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 1, 2024
in कविताएं
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'लो मैं जीत गया...'
‘लो मैं जीत गया…’

सुदूर जंगल से लगा एक कस्बा
एक खाली इमारत, चन्द कुर्सियां
गहरी रात का पहर
पांच वाट की पीली रोशनी

कुर्सी के पीछे बंधे हाथ
दो चमकती आंखे और
पसीने से तरबतर शरीर
उसे घेरकर खड़े कुछ
वर्दी वाले रोबोट

You might also like

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

एक कड़कती हुई आवाज-
‘यहां किसके कहने पर आए ?’

कुएं से निकलती एक धीमी मगर दृढ़ आवाज-
‘अपनी अंतरात्मा की आवाज पर आया’

तेरी अंतर्रात्मा की…
चटाख…
मुंह के कोने से खून रिसने लगा

बहुत दिनों बाद उसे
अपने गर्म लहू का स्वाद मिला
वह चीखा- ‘यह लड़ाई हम सबकी है,
महज आदिवासियों की नहीं’

इस बार सीधी लाठी उसके पेट पर
उसने लगभग उल्टी कर दी

लेकिन आवाज और बुलंद हो गयी,
रात के सन्नाटे को चीरती-
‘तुम लोग जितने क्रूर होते जाओगे,
उतना ही हारते जाओगे और
अंत मे हम ही जीतेंगे’

मां की गाली के साथ इस बार
ज़ोरदार मुक्का उसकी नाक पर
अच्छा ! ये अकड़ !
वो चिल्लाकर उसकी आंखों मे आंख डालकर,
नफरत से बोला-
‘अब दिखा जीतकर…’

उसका वाक्य खत्म ही हुआ था कि
उसकी नफरत उगलती एक आंख पर
छप से गीला सा कुछ पड़ा
और सफेद मकड़ी सा छप गया…

कुर्सी पर बंधे उस बुजुर्ग ने
मुश्किल से सांस लेते हुए कहा-

‘लो मैं जीत गया.’

  • मनीष आजाद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

अभावों में भी क्रांतिकारी गीतों की मशाल जलाते रहे शंकर शैलेंद्र

Next Post

नवनीत पांडेय : ‘भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
Next Post

नवनीत पांडेय : 'भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भाजपा-आरएसएस संविधान से ‘समाजवादी और सेकुलर’ शब्द हटाने के लिए माहौल बना रहे हैं

January 5, 2024

मोदी सरकार के साढ़े तीन साल बाद देश

November 17, 2017

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.