जब फ़ासिस्ट मज़बूत हो रहे थे
जर्मनी में जब फासिस्ट मजबूत हो रहे थे और यहां तक कि मजदूर भी बड़ी तादाद में उनके साथ जा...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
जर्मनी में जब फासिस्ट मजबूत हो रहे थे और यहां तक कि मजदूर भी बड़ी तादाद में उनके साथ जा...
यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो ?...
सुब्रतो चटर्जी आज जब इस श्रृंखला की चौथी कड़ी लिख रहा हूं, बहुत कुछ बदल गया है. एक तस्वीर, जो...
हिमांशु कुमार, गांधीवादी कार्यकर्ता मेरा जन्म एक सवर्ण हिन्दू परिवार में पुरुष के रूप में हुआ है इसलिए मेरा दायित्व...
राम चन्द्र शुक्ल अगर चीन विश्वसनीय नहीं है तो अमेरिका तो कदापि भारत के लिए विश्वसनीय नही है. भारत के...
कोरोना वायरस के नाम पर दुनियाभर में कोहराम मचाने के बाद अब पता चल रहा है कि यह बीमारी ही...
आईआईटी इंदौर में 22 अगस्त से एक नया कोर्स शुरू किया गया है जिसमें छात्र ज्ञान-विज्ञान की ऐतिहासिक किताबें संस्कृत...
हिमांशु कुमार, गांधीवादी कार्यकर्ता क्या किसी एक परीक्षा से लाखों बच्चों की योग्यता के बारे में जाना जा सकता है...
आज राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस था. ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों ने कवर किया है या नहीं, अब इस सवाल का मतलब नहीं...
शहर के बाइपास के मुहाने तक बहुत सन्नाटा फैला है दबे पांंव दाखिल होना यहांं एकतरफ़ा युद्ध विराम की घोषणा...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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