अब यहां से कहां जाएं हम – 3
सुब्रतो चटर्जी आज जब इस सवाल पर लिखने बैठा हूं, पुल के नीचे से बहुत सारा पानी बह चुका है....
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
सुब्रतो चटर्जी आज जब इस सवाल पर लिखने बैठा हूं, पुल के नीचे से बहुत सारा पानी बह चुका है....
रविश कुमार, अन्तराष्ट्रीय जन-पत्रकार भारत के सामाजिक-राजनीतिक मानस में एक हीनग्रंथि है. कड़े निर्णय लेने और भाषणबाज नेता का कांप्लेक्स...
सुब्रतो चटर्जी लॉकडाउन के पहले हफ़्ते में इस लेख की पहली कड़ी मैंने लिखा था. बंद हुए शहर गांंव, उजड़ते...
सोचिये अगर दुनिया से समाप्त हो जाता धर्म सब तरह का धर्म मेरा भी, आपका भी तो कैसी होती दुनिया...
चीन के साथ भारत का सीमा विवाद लगातार बढ़ रहा है. पिछले दिनों चीन के साथ झड़प में 20 सैनिकों की...
बहुत से मित्रों ने पूछा है कि जीडीपी के 23.9 फीसदी गिरने का मतलब क्या है और मुझ पर इसका...
मैंने बम नहीं बांंटा था ना ही विचार तुमने ही रौंदा था चींटियों के बिल को नाल जड़े जूतों से....
एक पागल शासक खुद के साथ साथ अपने पद की गरिमा भी मिटा देता है. यह बात भारत के कुख्यात...
इतने दावे कि गिनती भूल जाता हूं गनीमत कि डेढ़ घंटे ही लगे एलईडी की दूधिया रौशनी में हाई वे...
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना बेचैनियां तो हैं...और ये बढ़ती भी जा रही हैं. मीडिया और सरकारी तंत्र...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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