दक्षिणपंथी अवसरवादी गद्दार सुरेंद्र उर्फ जलाल और सुखविंदर कौर का भंडाफोड़ करो, दक्षिणपंथी अवसरवाद को पंजाब की मिट्टी में गाड़ दो !

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की उत्तर तालमेल कमेटी (एनसीसी) के नाम से जारी 28 सितंबर 2026 के एक प्रेस बयान में जलाल और सुखविंदर कौर को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की गई है. बयान में दोनों पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों, संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन और दक्षिणपंथी अवसरवादी राजनीति करने के आरोप लगाए गए हैं.
प्रेस बयान के अनुसार, जलाल वर्ष 2024 में एनसीसी में शामिल हुआ था. बयान में दावा किया गया है कि उसके घर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की छापेमारी के बाद वह संगठनात्मक गतिविधियों में निष्क्रिय हो गया और कमेटी के साथ तालमेल करना बंद कर दिया. इसके बाद उसे संगठन में निचले स्तर पर पदावनत किया गया. बयान में यह भी कहा गया है कि जलाल और सुखविंदर कौर से बार-बार संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने की अपील की गई, लेकिन उन्होंने पार्टी नेतृत्व के तहत काम करने से इनकार कर दिया.
‘पंजाबनामा’ संगठन को लेकर आरोप
एनसीसी के बयान में आरोप लगाया गया है कि जलाल और सुखविंदर कौर ने ‘पंजाबनामा’ नाम से एक पार्टी-विरोधी गुट के गठन को बढ़ावा दिया. बयान में इस गुट को बड़े जमींदारों के नेतृत्व वाला वर्गीय समझौतावादी संगठन बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि यह क्रांतिकारी जनसंगठनों तथा उनके नेताओं के खिलाफ काम कर रहा है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
बयान में दोनों पर पार्टी की घोषित राजनीतिक लाइन के साथ होने का दावा करने के बावजूद संगठन निर्माण की दिशा में काम नहीं करने, छह महीने से अधिक समय तक पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं होने और पंजाब एसओसी के नाम पर अलग गुट बनाने का भी आरोप लगाया गया है. कमेटी ने इसे संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन बताया है.
अवसरवाद और संशोधनवाद पर वैचारिक हमला
प्रेस बयान में अवसरवाद, विघटनवाद और संशोधनवाद के सवाल पर विस्तार से वैचारिक चर्चा की गई है. इसमें लेनिन और माओ के विचारों का हवाला देते हुए पार्टी के भीतर वर्गीय हितों, राजनीतिक अवसरवाद और संगठनात्मक विचलन के मुद्दे उठाए गए हैं. बयान में पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद रखने वाले कुछ लोगों की आलोचना की गई है.
एनसीसी ने आरोप लगाया है कि जलाल और सुखविंदर कौर ने ‘नगाड़ा’ नामक पत्रिका में पार्टी के अस्तित्व पर सवाल उठाए और सीमा-विश्वविजय के साथ मिलकर पार्टी-विरोधी रुख अपनाया. बयान में इसे संगठन को कमजोर करने की कोशिश बताया गया है.
पुराने नेतृत्व से अलग होने का दावा
बयान के अंतिम हिस्से में एनसीसी ने दावा किया है कि उसने पुराने विघटनवादी और अवसरवादी नेतृत्व से खुद को अलग कर लिया है. कमेटी ने गोपाल मिश्रा, सीमा-विश्वविजय, जोगिंदर सिंह, राजू, जलाल और सुखविंदर कौर के नाम लेते हुए कहा है कि इन लोगों को संगठन से निष्कासित किया गया है.
प्रेस बयान में पंजाब के पार्टी कार्यकर्ताओं और क्रांतिकारी जनता से मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच एकजुट होने, पंजाब की विद्रोही परंपरा को आगे बढ़ाने और संगठन की राजनीतिक-सांगठनिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने की अपील की गई है.
यह खबर एनसीसी के नाम से जारी प्रेस बयान पर आधारित है. इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब उपलब्ध नहीं है. बहरहाल, यहां हम मूल प्रेस विज्ञप्ति को भी प्रकाशित कर रहे हैं.
भाकपा माओवादी द्वारा जारी मूल प्रेस बयान
दक्षिणपंथी अवसरवादी गद्दार सुरेंद्र उर्फ जलाल और सुखविंदर कौर का भंडाफोड़ करो, दक्षिणपंथी अवसरवाद को पंजाब की मिट्टी में गाड़ दो, मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद का लाल झंडा ऊंचा उठाओ !
कामरेडों और प्यारी जनता,
आपको बता दें कि हमने जलाल और सुखविंदर कौर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. जलाल उत्तर तालमेल कमेटी (एनसीसी), यानी हमारी कमेटी, का सदस्य था, जबकि सुखविंदर कौर पंजाब की पूर्व एसओसी की सदस्य थी. जलाल को साल 2024 में एनसीसी में शामिल किया गया था, लेकिन उसके घर पर एनआईए की छापेमारी के बाद वह निष्क्रिय हो गया और एनसीसी के कामकाज के संबंध में हमारे साथ तालमेल करना बंद कर दिया. इसलिए हमने उसे एसओसी स्तर पर पदावनत कर दिया. हमने जलाल और उसकी सहयोगी सुखविंदर कौर से बार-बार कम-से-कम राज्य स्तर पर काम करने की अपील की. हमने उनसे पार्टी के कामकाज की जिम्मेदारी संभालने के लिए भी कहा. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने हमारे साथ तालमेल नहीं किया. कई बार आग्रह करने के बाद जब जलाल हमसे मिला, तो उसने साफ तौर पर कहा कि वे हमारी पार्टी के नेतृत्व में कामकाज नहीं करेंगे.
इसके अलावा, उनकी निम्नलिखित गतिविधियों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है:
- इन्होंने 'पंजाबनामा' नाम से पार्टी-विरोधी, बड़े जमींदार नेतृत्व वाले वर्गीय समझौतावादी गुट के गठन को बढ़ावा दिया. इस संगठन का गठन गद्दार हरमनप्रीत ने किया था. यह संगठन राज्य की एजेंसियों के साथ मिलकर क्रांतिकारी जनसंगठनों और उनके नेताओं पर हमला करने का काम कर रहा है. इस संगठन का एकमात्र उद्देश्य हमारी पार्टी पर हमला करना है. असीन उर्फ गगन उर्फ अमन वह गद्दार है, जिसने वेणुगोपाल को आत्मसमर्पण करने का आग्रह करते हुए चिट्ठी लिखी थी. अब वह इस गुट को मजबूत करने के लिए गद्दार हरमन के साथ काम कर रहा है. जलाल और सुखविंदर, हरमन के साथ मिलकर और दुश्मन वर्गीय ताकतों के साथ इतने गहरे तालमेल में काम कर रहे हैं कि वे क्रांतिकारी खेमे से हटकर दुश्मन और राज्य के एजेंटों के खेमे में चले गए हैं.
- वामपंथी लफ्फाजी की आड़ में जलाल और उसकी पार्टनर सुखविंदर कौर दक्षिणपंथी अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं. इस अवसरवाद की हद यह है कि पार्टी लाइन के साथ होने का दावा करने के बावजूद उन्होंने यूजी पार्टी निर्माण के संबंध में एक इंच भी आगे कदम नहीं बढ़ाया है. इसके विपरीत, वे पार्टी को यूजी पार्टी निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं.
- इन्होंने छह महीने से अधिक समय तक पार्टी ढांचों में नहीं बैठने को लेकर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया और पंजाब-एसओसी के नाम पर एक पार्टी-विरोधी गुट भी बना लिया है.
- इन्होंने पार्टी कैडरों और नेतृत्व के खिलाफ सफेद आतंक फैलाने के तरीके का इस्तेमाल किया. उन्होंने सशस्त्र संघर्ष की राजनीति के बारे में भय फैलाया. वे अपने कैडरों को लगातार चेतावनी देते रहे कि यदि वे पार्टी के साथ तालमेल में काम करेंगे, तो पार्टी सशस्त्र संघर्ष शुरू कर देगी और उन्हें मरवा देगी या जेल भिजवा देगी.
कामरेड लेनिन ने कहा था कि अवसरवादी पार्टी के भीतर दुश्मन के एजेंट होते हैं. वे दुश्मन से अलग कैसे हैं? वे आम तौर पर सर्वहारा वर्ग और विशेष तौर पर पार्टी के गद्दार हैं. हमारी केंद्रीय समिति ने 19-11-2017 को जलाल में अर्थवाद, कानूनवाद, सुधारवाद और नौकरशाही जैसी गैर-सर्वहारा प्रवृत्तियों की पहचान की थी. ये गंभीर प्रवृत्तियाँ पहले भटकाव में विकसित हुईं, फिर एक समानांतर अवसरवादी लाइन में तब्दील हो गईं और फिलहाल विघटनवाद तक पहुंच गई हैं.
असल में, साल 2006 में पंजाब राज्य कमेटी के नेतृत्व में एक कमगिनती (अल्पमत) खेमा उभरा था. इस खेमे का मत था कि पंजाब में पार्टी की पीएलजीडब्ल्यू के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं, इसलिए पार्टी के कार्यक्रम को पंजाब में लागू नहीं किया जाना चाहिए. इसके विपरीत, नेतृत्व कर रहा था. जलाल शुरू से ही इस तर्क से सहमत था, लेकिन इस लाइन को खुले तौर पर अपनाने का साहस और कदम वह नहीं उठा सका. राजू एक ईमानदार अवसरवादी है, जबकि जलाल बेईमान किस्म का अवसरवादी है, इसलिए वह अपनी लाइन को लगातार छिपाता रहा.
कामरेड माओ ने कहा था कि बुर्जुआ हमसफर तब पार्टी और क्रांति को छोड़ देता है, जब उसे लगता है कि क्रांति उसके व्यक्तिगत हितों को नुकसान पहुंचा रही है. जब जलाल और सुखविंदर को यह महसूस हुआ कि पार्टी का सदस्य होने के कारण उनके हित प्रभावित हो रहे हैं, तो उन्होंने पार्टी को खत्म करने का रास्ता अपनाया. एनआईए की छापेमारी के बाद उनकी निष्क्रियता को इसी से समझा जा सकता है.
कामरेड माओ ने कहा था कि, 'यहां गलती इस तथ्य की उपेक्षा करने में है कि बुर्जुआ वर्ग (और विशेष रूप से बड़ा पूंजीपति वर्ग) न केवल निम्न पूंजीपति वर्ग और किसानों पर प्रभाव डालता है, बल्कि सर्वहारा वर्ग और कम्युनिस्ट पार्टी को प्रभावित करने के लिए भी अपनी पूरी ताकत लगाता है. उसका उद्देश्य उनकी वैचारिक, राजनीतिक और सांगठनिक आजादी को नष्ट करना, उन्हें बुर्जुआ वर्ग और उसकी राजनीतिक पार्टी का पिछलग्गू बना देना और यह सुनिश्चित करना है कि क्रांति का लाभ केवल वही या उसकी राजनीतिक पार्टी उठाए.
'यह गलती इस तथ्य की उपेक्षा करने में भी है कि जब भी क्रांति उसके अपने स्वार्थी हितों या उसकी राजनीतिक पार्टी के हितों से टकराती है, तो बुर्जुआ वर्ग क्रांति के साथ विश्वासघात कर देता है. इन सभी बातों की उपेक्षा करना दक्षिणपंथी अवसरवाद है.
'चेन तु-श्यू के दक्षिणपंथी अवसरवाद की विशेषता यह थी कि उसने सर्वहारा वर्ग को बुर्जुआ वर्ग और उसकी राजनीतिक पार्टी के स्वार्थी हितों के साथ समझौता करने के लिए प्रेरित किया. यही पहली महान क्रांति की विफलता का आगमन कारण था.'
यही साफ करता है कि पंजाब से लेकर यूपी तक के सभी विघटनवादी या तो निम्न पूँजीपति वर्ग के ऊपरी तबके से आते हैं या सीधे शासक वर्ग और उच्च जातीय पृष्ठभूमि से आते हैं. पार्टी और आंदोलन के प्रति किसी व्यक्ति की प्रतिबद्धता का निर्धारण उसके वर्गीय हितों से होता है. जब आंदोलन उभार पर था, तब निम्न पूंजीपति वर्ग और शासक वर्ग के लिए नायक बनना उनके वर्गीय हितों के अनुकूल था. लेकिन आज के समय में जब पार्टी और उसकी राजनीतिक लाइन के प्रति निस्वार्थ सेवा और विश्वास की जरूरत है, तो निम्न पूंजीपति वर्ग तथा शासक वर्ग की घमंडी सामंती तुच्छ सोच इसकी अनुमति नहीं देती.
हाल ही में 'नगाड़ा' नामक एक पत्रिका में उसके संगठनकर्ता जलाल और सुखविंदर ने सीधे तौर पर पार्टी पर हमला बोला और दावा किया कि पार्टी अब अस्तित्व में नहीं है. यह उसी महान गद्दार विघटनवादी लाइन की भाषा है, जो कामरेड लेनिन के समय रूस में कम्युनिस्ट आंदोलन के पीछे हटने के दौर में कहती थी कि विघटन करने के लिए अब कोई पार्टी बची ही नहीं है.
जलाल और सुखविंदर ने सीमा विश्वविजय के साथ मिलकर यह साबित कर दिया है कि वे लारिन और उसके जैसे लोगों के पिट्ठू हैं. हम कहते हैं कि तुम्हारी यह इच्छा कभी पूरी नहीं होगी. पार्टी को पराजित नहीं किया जा सकता. वह आगे बढ़ती रहेगी, क्योंकि इस धरती पर ऐसी कोई ताकत नहीं है जो समाज के साम्यवादी और तार्किक विकास को रोक सके. ऐतिहासिक ताकत के बतौर सर्वहारा वर्ग की कामयाबी और सर्वहारा वर्ग की तानाशाही स्थापित करने के एक हथियार के बतौर उसकी पार्टी की कामयाबी इसी प्रकार अपरिहार्य है. इसी तरह, जलाल और सुखविंदर, तुम्हारा पतन भी अपरिहार्य है. इतिहास तुम्हें उस धूल के रूप में याद रखेगा, जिसे नई शुरुआत की ओर आगे बढ़ने के लिए झाड़कर हटाना पड़ा था.
हम पंजाब के सभी कामरेडों और क्रांतिकारी जनता से अपील करते हैं कि वे तीसरे विश्व युद्ध की बढ़ती परिस्थिति के खिलाफ उठ खड़े हों, पंजाब की धरती की क्रांतिकारी विद्रोही परंपरा को आगे बढ़ाएँ और हमारी पार्टी के नेतृत्व में उठ रही क्रांतिकारी लहर में शामिल हों. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सामंती-ब्राह्मणवादी जमींदारों के खिलाफ सशस्त्र गुरिल्ला संघर्षों का नेतृत्व करने वाले सिख गुरुओं को भी अधिक जोरदार हमला करने के लिए पीछे हटना पड़ा था. इसी प्रकार, हमारी पार्टी भी दुश्मन पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रहार करने और नवजनवादी क्रांति (NDR), समाजवाद तथा साम्यवाद कायम करने के लिए अपनी वैचारिक और राजनीतिक ताकत मजबूत कर रही है. पंजाब की जनता इसे बखूबी समझती है. वे हमारे साथ हैं, न कि गद्दार भगोड़ों के साथ.
हम पंजाब के सभी कामरेडों और क्रांतिकारी जनता से अपील करते हैं कि वे तीसरे विश्व युद्ध की बढ़ती परिस्थिति के खिलाफ उठ खड़े हों, पंजाब की धरती की क्रांतिकारी विद्रोही परंपरा को आगे बढ़ाएँ और हमारी पार्टी के नेतृत्व में उठ रही क्रांतिकारी लहर में शामिल हों. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सामंती-ब्राह्मणवादी जमींदारों के खिलाफ सशस्त्र गुरिल्ला संघर्षों का नेतृत्व करने वाले सिख गुरुओं को भी अधिक जोरदार हमला करने के लिए पीछे हटना पड़ा था. इसी प्रकार, हमारी पार्टी भी दुश्मन पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रहार करने और नवजनवादी क्रांति (NDR), समाजवाद तथा साम्यवाद कायम करने के लिए अपनी वैचारिक और राजनीतिक ताकत मजबूत कर रही है. पंजाब की जनता इसे बखूबी समझती है. वे हमारे साथ हैं, न कि गद्दार भगोड़ों के साथ.
आखिर में, इस प्रेस बयान के जरिए हम ऐलान करते हैं कि हमारी कमेटी, यानी एनसीसी, जिसका गठन नवंबर 2023 के पीबी प्रस्ताव की रोशनी में किया गया था, ने खुद को पुराने और उच्च स्तर के सभी विघटनवादी तथा अवसरवादी नेतृत्व से मुक्त कर लिया है. हमने दिल्ली के चेन तु-श्यू गोपाल मिश्रा, यूपी के चेन तु-श्यू सीमा-विश्वविजय, हरियाणा के चेन तु-श्यू जोगिंदर सिंह और पंजाब के चेन तु-श्यू राजू और अब जलाल और सुखविंदर को निष्कासित कर दिया है. हम अवसरवाद-विघटनवाद-संशोधनवाद और उसके सभी रूप-रंगों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेते हैं, ताकि हमारी पार्टी में लेनिनवादी पार्टी कार्यपद्धति और नेतृत्व की माओवादी कार्यशैली को और अधिक मजबूत किया जा सके.
जारीकर्ता: उत्तर तालमेल कमेटी, भाकपा (माओवादी), तारीख: 28 सितंबर, 2026
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