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लघुकथा

लघुकथा के नवीनतम लेख और विचार।

139 प्रकाशित लेख
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कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

By Rohit Sharma March 15, 2026in : लघुकथा 0 86

हमारे समय के जरूरी कथाकार व उपन्यासकार साथी कैलाश वनवासी नवें दशक के उत्तरार्द्ध से आते हैं और समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप के साथ अपनी मुकाम सुनिश्चित करते हैं. साथी का हिन्दी लेखन की दुनिया में आगाज़ न केवल कथा साहित्य व उपन्यास तक में ही सीमित

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UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

By Rohit Sharma March 11, 2026in : लघुकथा 0 67

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह पूरे देश में 301वां रैंक को लेकर आकांक्षा सिंह की भयंकर बेइज्जती के बाद रात में आतंकी बाबा ब्रह्मेश्वर मुख

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एन्काउंटर

एन्काउंटर

By Rohit Sharma February 14, 2026in : लघुकथा 0 280

वसुधा, निक नेम से प्रकाशित इस कहानी की लेखिका का असली नाम विजयलक्ष्मी उर्फ भूमिका है. वे तेलंगाना आंदोलन के समय माओवादी आन्दोलन से जुड़ीं. यह दुखद इत्तेफाक है कि विजयलक्ष्मी उर्फ भूमिका 21 मई 2025 को सीपीआई माओवादी के महासचिव वासवराज के साथ एनकाउण्टर में ही खु

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धिक्कार

धिक्कार

By Rohit Sharma February 14, 2026in : लघुकथा 0 164

'पुलिस आ रही है, भागो, भागो...' गांव भर में यह आवाज गूंजी, और हर कोई सिहर उठा. पुलिस रेड जंगल के बीच बसे उस गांव के लिए नई नहीं थी. सिर्फ उसी गांव के लिए नहीं, किसी भी गांव के लिए नई नहीं थी, फिर भी सब डर गए. उस आवाज के पीछे हर बार जो गाली, अपमान और तबाही आती

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मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

By Rohit Sharma February 7, 2026in : लघुकथा 0 284

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात यह कहानी किसी कल्पना की उपज नहीं है. यह कहानी है जंगल के उस सच की, जो नक्शों में नहीं मिलता और

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इतिहास तो आगे ही बढ़ता है...

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है...

By Rohit Sharma January 5, 2026in : लघुकथा 0 519

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है... ’माओवादियों के पुतले जलाते लोग’ अपने टैबलेट पर अखबार की हेडलाइन पढ़ते हुए सुधा ने उस खबर को 'जूम इन' किया. खबर के नीचे दी गई तस्वीर में काले कपड़े पहने बीएसए

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सवाल

सवाल

By Rohit Sharma August 16, 2025in : लघुकथा 0 356

सवाल 15 अगस्त के दिन, मोती और चिकारा स्कूल भ्रमण पर निकले. मोती: (छात्रों को देखते हुए) बच्चों ! आज हम देशभक्ति, विकास और आत्मनिर्भरता पर चर्चा करेंगे. रोहित: (हाथ उठाकर) मोती जी, आपने

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दो टांग वाला गधा

दो टांग वाला गधा

By Rohit Sharma April 12, 2025in : लघुकथा 0 975

दो टांग वाला गधा एक गधा था‌. इसे विधि की विडंबना कहिए या कुछ और कि उसके दो पैर और दो हाथ थे. इस कारण गधे, उसे गधा नहीं मानते थे और आदमी, उसे आदमी नहीं. दोनों तरफ़ से उसे लात पड़ती थी. इ

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आग का बीज

आग का बीज

By Rohit Sharma March 29, 2025in : लघुकथा 0 585

एक छोटे गांव में एक विधवा स्त्री पेलाग्रे रहती थी, जिसका बेटा पावेल मजदूरों की हड़ताल में शामिल हो गया था. गांव के जमींदार और पुलिस उसे ‘गद्दार’ कहते थे. पेलाग्रे पहले डरती थी, उसे लगता था कि उसका बेटा गलत रास्ते पर है. लेकिन एक रात पावेल घर आया, उसकी आंखों मे

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सोचेगा सिर्फ राजा...या फिर बागी, सोचना बगावत हुई

सोचेगा सिर्फ राजा...या फिर बागी, सोचना बगावत हुई

By Rohit Sharma March 19, 2025in : लघुकथा 0 433

मुखबिर की खबर पर, पुलिस बल थाने से निकला. सशस्त्र जवानों ने जंगल में उजाड़ खंडहर घेर लिया. एसपी साहब लाउडस्पीकर पर चीखे- हिलने की कोशिश की, तो भूनकर रख दूंगा. हाथ उठाये आधे दर्जन जघन्य विचारी बाहर आये. मुंह पर गमछा बांधे अपराधियों को अगले दिन पत्रकारों के सामने

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