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कविताएं के नवीनतम लेख और विचार।

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विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

By Rohit Sharma March 22, 2026in : कविताएं 0 101

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज ! ईरान के पास 3000 किलोमीटर वाली मिसाइल है इज़रायल के पास 5000 किलोमीटर वाली मिसाइल है अमेरिका के पास 10000 किलोमीटर वाली मिसाइल होगी - मेरे लिए तो तीनों ही

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SEDITIOUS RIVER

SEDITIOUS RIVER

By Rohit Sharma September 7, 2025in : कविताएं 0 299

Seditious river In the hushed silence of the Seditious river Along the overgrowth The sail boat raises An ominous finger Pointing towards the Darkening sky And, sets upon A journey to n

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कौन है श्रेष्ठ ?

कौन है श्रेष्ठ ?

By Rohit Sharma July 31, 2025in : कविताएं 0 487

जिन्होंने खेतों में पसीना बहाया, लोहे को यंत्रों में ढाल सभ्यता को गति दी, पशु पालन से समाज को पोषित किया, जिन हाथों ने चमड़े को चप्पल में ढाला, कांटों भरी राहों को नरम बना गए रेशम-कपास से वस्त्र बुनें, सभ्यता को लज्जा और गरिमा दी जिन्होंने नाव बनाई, दूरियों क

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स्वप्न

स्वप्न

By Rohit Sharma June 25, 2025in : कविताएं 0 378

स्वप्न जिंदगी उसके लिए कड़ी धूप थी छाह की तलाश उसे हरदम रहती जो उसे स्वप्न में ही मिलती उस दिन स्वप्न में जब वह खड़ा था एक नीम छाह तले कोई जोर से चीखा तुमने मेरे लगाए पेड़ को अपवित्र कर दि

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ढक्कन

ढक्कन

By Rohit Sharma June 14, 2025in : कविताएं 0 452

बोतल का ढक्कन बहुत मामूली चीज है खोने पर हम इसे खोजते जरूर हैं लेकिन इसके लिए अपना कोई काम नहीं रोकते मामूली से मामूली काम भी नहीं जैसे बिस्तर पर उल्टी पड़ी तकिया को सीधा करना जल्दी ही हम इसे भूल भी जाते हैं और किसी कोने में पड़ी बोतल, ढक्कन के इंतजार में मुंह

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मैं तुम सबको देख रहा हूं -

मैं तुम सबको देख रहा हूं -

By Rohit Sharma June 4, 2025in : कविताएं 0 417

मैं तुम सबको देख रहा हूं - मैं तुम सबको देख रहा हूं. मैं तुम्हारा हर झूठ रिकॉर्ड कर रहा हूं. मैं तुम्हारी हर तोड़-मरोड़कर बताई गई बातों को संग्रहित कर रहा हूं. मैं इब्राहीम टरोरे हूं और

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आखिरी सलाम...

आखिरी सलाम...

By Rohit Sharma June 2, 2025in : कविताएं 0 389

आखिरी सलाम... कॉमरेड हम तुम्हें आखिरी सलाम भी नहीं दे पाये तुम भी तो हमारा इंतजार कर रहे होगे अख़बार में तुम्हारी खुली आंखे देख कर तो यही लगा लेकिन हम क्या करते हमारे तुम्हारे बीच सत्ता

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फटे जूते

फटे जूते

By Rohit Sharma May 20, 2025in : कविताएं 0 684

फटे जूते मेरे जुराबों के नीचे कई छेद हैं जिन्हें छुपाने की जद्दोजहद में फट गए हैं जूते मेरे मेरे जूतों और सड़क के बीच एक शत्रु भाव भी है और मित्रता भी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं जिस समय

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नून रोटी

नून रोटी

By Rohit Sharma May 11, 2025in : कविताएं 0 418

सदाशिव के ध्यान में एक निहित वक्रोक्ति है जिस समय तुम किसी दिशा पटानी के तिर्यक में बरमूडा में भटके हवाई जहाज़ सा गोते लगाते हो मैं एक आग में झुलसी हुई स्त्री का चेहरा अपने हाथों में ले कर किसी नंदन वन की सैर पर हूं पूछोगे नहीं मुझसे कितनी घृणा है मुझे मुझ पर

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दिल्ली में कम्युनिस्ट

दिल्ली में कम्युनिस्ट

By Rohit Sharma May 10, 2025in : कविताएं 0 316

दिल्ली में कम्युनिस्ट होना सरल है बनिस्बत हमारे शहर के और भी कठिन है, हमारे जिले के किसी गांव के दिल्ली में कम्युनिस्ट से कोई नहीं घबराता है सोचते हैं कि कविता-वविता लिखता होगा अकादमियों में भाषण देता होगा शराब पी कर नारे लगाता होगा तब इसे ज्यादातर लोग मत्त सम

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