
वो बच्चे
जिन्होंने अभी नहीं सीखा था
पांव में जूते पहनना
युद्ध की विभीषिका के बीच
वो बच्चे
ढूंढ लाते हैं मलबे में दबे
अपने सफ़ेद जूते
जो अब खून से लाल हो चुके हैं
मगर उन्हें अब वो जूते
कौन पहनाएगा ?
- साहित्य विजय
[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]
