Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

2024 में मोदी जीतकर आए तो देश कातिलों के हाथ में होगा, हम आप सब जेल में होंगे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 27, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
जगदीश्वर चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने देश के मध्यवर्ग को असभ्यता को शिरोधार्य करने, असभ्य को सम्मान देने, पूजा करने, असभ्य को और असभ्य बनाने का मंत्र दिया. साथ ही असभ्य भाषा की हिमायत और असभ्य भाषिक प्रयोग करने की दिशा में तेज़ी से मोड़ दिया है. बटुकों की असभ्य भाषा और मोदी भक्तों की अंधभक्ति निश्चित रुप से निंदनीय है. इसने एक ही झटके में मध्यवर्ग में व्याप्त असभ्य भावबोध और असभ्य भाषिक आचरण को सरेआम फेसबुक-यू-ट्यूब जैसे ग्लोबल मीडिया में उजागर कर दिया है.

आज सारी दुनिया आरएसएस वाले भारत के हिंदू मध्यवर्ग के बडे समुदाय में व्याप्त असभ्यता को यू-ट्यूब से लेकर फेसबुक तक देख रही है. यह मोदीजनित असभ्यता का हिंदू नवजागरण है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आने के पहले देश में असभ्यों की कमी नहीं थी. एक बडा वर्ग मध्यवर्ग में असभ्य था. फेसबुक-यू-ट्यूब आदि के तंत्र के सामने आने के बाद हमारे समाज में तुलनात्मक तौर पर राजनीति से लेकर संस्कृति तक सभी क्षेत्रों में असभ्यता का छिपा हुआ चेहरा सबके सामने खुल गया है. इसमें ईंधन का काम किया है मोदी, आरएसएस, साइबर सैल और बटुक मंडली ने.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

देश में सांप्रदायिक उन्माद नया नहीं है, न दलितों और अल्पसंख्यकों का शोषण. न रचनाकारों की अवज्ञा और अपमान. चालीस बरस पहले नागरिक अधिकारों के पतन में इमरजेंसी एक मिसाल मानी गई थी. लेकिन जब हम समझने लगे कि शासन की भूमिका में काले दिनों का वह पतन इतिहास की चीज हो गया, नागरिकों पर संकट का नया पहाड़ आ लदा है. मौजूदा संकट ज्यादा भयावह और खतरनाक है क्योंकि यह ऐलानिया नहीं है; इसलिए कोई आसानी से इसकी जिम्मेदारी भी नहीं लेता. जबकि इसके पीछे एक दकियानूसी, समाज को बांटने और घृणा की खाई में धकेलने वाली वह हिंसक मानसिकता सक्रिय जान पड़ती है, जिसे देश ने कभी बंटवारे के वक्त देखा-भोगा था और जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सरेआम हत्या के समय मौजूद थी.

आज मोदी-आरएसएस के कारण विचार, असहमति, विरोध, बहुलता और सहिष्णुता के मूल्य खतरे में हैं. शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्र अब जैसे हाशिये के तिरस्कृत विषय हैं. समाज-विरोधी और अलगाववादी शक्तियां सत्ता के साथ कदमताल कर रही हैं; धार्मिक प्रतीकों को सार्वजनिक प्रतीक बनाकर लोगों के घर जलाए जा रहे हैं; अल्पसंख्यकों और दलितों को जिन्दा जलाया जा रहा है; घर-वापसी, लव-जेहाद जैसे तुच्छ अभियान उच्च संरक्षण में अंजाम दिए जा रहे हैं, जिनसे समुदायों में अभूतपूर्व हिंसा भड़की है.

असहमति या विरोध जताने वालों को देशद्रोही करार दिया जाने लगा है; कटु सत्य बोलने और लिखने वालों को पंगु बनाया जा रहा है, मौत के घाट उतारा जा रहा है; कार्टून से लेकर किताब, सिनेमा, कला, यहां तक भी खाद्य भी प्रतिबंधित घोषित किए जा सकते हैं – किए जा रहे हैं; रचनात्मक इदारों में अयोग्य लोग रोप दिए गए हैं; तोड़े-मरोड़े इतिहास के पाठ्यक्रम बनाए और पढ़ाए जाने लगे हैं; लोगों की रुचियों, खान-पान, पहनावे और अभिव्यक्ति तक को नियंत्रित किया जा रहा है; समाज पर छद्म धार्मिकता, छद्म मूल्यबोध और छद्म सांस्कृतिक-बोध थोपा जा रहा है.

प्रधानमंत्री को अपने फैशन, स्थानीय चुनावों और विदेश यात्राओं से फुरसत नहीं कि इस अनीति, अन्याय और अनर्थ को शासन से सीधे मिल रही शह और संरक्षण से बचा सकें. जाहिर है, सरकार की नीयत और कार्यक्षमता संदेह के गहरे घेरे है. यह संकट अभूतपूर्व है, नियोजित है और इसमें निरंतरता है; इतना ही नहीं इसके पीछे एक ही मानसिकता या विचारपद्धति है. इसलिए, स्वाभाविक ही, स्वस्थ लोकतंत्र और देश की मूल्य-चेतना से सरोकार रखने वाले लोग आहत और चिंतित हैं.

मोदी के इतिहास पाखंड को समझने के लिए एक ही उदाहरण काफी है. मोदी को पीएम वायरस ने घेर लिया है. उन्होंने वोट के लिए संघ और भाजपा के नेताओं का ज़िक्र करना बंद कर दिया है. वे एकबार भी गोलवल्कर, दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी का नाम लेने की कोशिश नहीं करते. क्या बात है संघ में क्या कोई नाम लेने लायक भी नहीं बचा है ? सभ्यलोग निजी प्रसंगों को निजी रहने देते हैं लेकिन अब जनसभाओं में जातिगत अपील करके नैतिकता और राजनीति के मानकों का भी उल्लंघन किया जा रहा है.

मोदी को संस्थान नहीं कचरा घर चाहिए. जो संवैधानिक संस्थाएं हैं उनको कचरे के ढेर में बदल दिया गया है. मोदी का लक्ष्य है ईमानदार को जेल में ठूंसो, घूसखोर को लूटपाट की छूट दो. लूटो, मारो, भागो. यह मोदी राजनीति का परिष्कृत फंडा है. आप इसके बाद भी मोदीभक्त हैं, तो हम यही कहेंगे आपको जल्दी बदलना चाहिए, वरना तय मानो 2024 में मोदी जीतकर आए तो देश कातिलों के हाथ में होगा, हम आप सब जेल में होंगे.

आप मोदी को अब तक हल्के में लेते रहे हैं. उसने बिना आपातकाल लगाए सीबीआई को तोड़ दिया, योजना आयोग तोड़ दिया, यूजीसी भंग हो गई, पे कमीशन को उसने सही रूप में लागू नहीं किया, न्यायपालिका आतंकित है. सेना, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में निवेश बढाने की बजाय कटौती की है. हजारों स्कूल भाजपा सरकारों ने बंद कर दिए. संघी लोग बेलगाम होकर सत्ता के संस्थानों का नियम तोड़कर शोषण कर रहे हैं.

तानाशाह कितना डरपोक होता है यह बात अब आम जनता को समझ में आ रही है. जनता अपनी ताकत को भी महसूस कर रही है. यही वजह है पानी की तरह पैसा बहाकर, नौकरशाही-सेठों-साहूकारों-गुंडों-कारपोरेट मीडिया और साइबर फौज को मैदान में उतारकर भी जनता का भय मोदीजी के अंदर से कम नहीं हो रहा. जनता का भय वास्तविक है. जनता जब डराने लगती है तो सारे हथियार भोंथरे हो जाते हैं.

चुनाव में क्या होगा हम नहीं जानते लेकिन यह बात तो साफ दिख रही है कि भाजपा के नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें बंद हो गयी हैं. अब तो सब भाजपाई मोदी की हुंकार का इंतजार करते रहते हैं लेकिन मोदीजी भी अब बोल नहीं रहे. पहले वे रोज बोलते थे, अब कभी-कभार बोलते हैं. जनता के भय ने सबकी बोलती बंद कर दी है.

दूसरी ओर अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है. मोदी ने आरबीआई द्वारा पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के रेग्यूलेशन को कमजोर किया है. सरकार को अधिशेष हस्तांतरित किए बिना रिजर्व बनाए रखने का विशेषाधिकार खत्म किया है. एक अलग पेमेंट रेग्यूलेटर बनाकर रिजर्व बैंक के अधिकार क्षेत्र को कम किया है.

इसके अलावा राष्ट्रीय विकास दर में अभूतपूर्व गिरावट आई है. बाजार, बैंक ठप्प पडे हैं. बेकारी चरम पर है. इतनी भयानक बेकारी पहले कभी नहीं देखी गयी. कोरोना में जनता की कोई ठोस मदद नहीं की. सरकारी संस्थानों और कमाई करने वाले संस्थानों की बड़ें पैमाने पर संपत्तियों को बेचा है. इसके बाबजूद आप यदि पीएम को समर्थन देते हैं तो राष्ट्रहित और जनहित दोनों की क्षति करते हैं.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

लाल जूते

Next Post

इजरायल और फिलिस्तीन के विवाद में मोदी की राजनीति और भारतीय पत्रकारिता की अनैतिक नग्नता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

इजरायल और फिलिस्तीन के विवाद में मोदी की राजनीति और भारतीय पत्रकारिता की अनैतिक नग्नता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

शिक्षा व्यवस्था : निजी नहीं सरकारी व्यवस्था को मजबूत करो

July 16, 2024

ग्लोबल वार्मिंग

February 11, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.