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पागल सावरकर और उसके पागल चेलों की अधूरी थ्योरी का हिन्दुस्तान होता तो क्या होता ?

बंटवारा, हिंदुस्तान का. रेडक्लिफ लाइन जमीन पर ही नहीं, आम हिंदुस्तानी के दिल पर चला हुआ वो चाकू है, जिसका...

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पं. बंगाल में नरेन्द्र मोदी के लोकप्रियता की त्रासदी

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना मोदी जी आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ते किसानों, बेरोजगारी से आजिज युवाओं, नौकरी...

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कोरोनावायरस की महामारी : लोगों को भयग्रस्त कर श्रम का मनमाना दोहन और शोषण

राम अयोध्या सिंह इस संदर्भ में यह पुछना लाजिमी है कि क्या दुनिया में इससे पहले जितने भी संक्रामक और...

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विकास मतलब जंगल में रहने वाले की ज़मीन छीन लो और बदमाश को दे दो

हिमांशु कुमार, प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता सलवा जुडूम से पहले बस्तर में मात्र चार सौ पूर्णकालिक माओवादी थे लेकिन जब आदिवासियों के...

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कोरोना महामारी, जिसको महामारी साबित करने के लिए प्रमाण नहीं, प्रचार की ज़रूरत

संत समीर दुनिया ने पहली महामारी ऐसी देखी है, जिसको महामारी साबित करने के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं, बल्कि प्रचार...

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