'कल बहुत जल्दी होता...और कल बहुत देर हो चुकी होगी...समय है आज’ कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी की अंग्रेज़...
Read moreDetailsआज की दुनिया को नीतिगत तौर पर राजनेता नहीं, वैश्विक वित्तीय शक्तियां संचालित कर रही है ! हेमन्त कुमार झा,एसोसिएट...
Read moreDetailsप्रेमी फ़क़ीर होते हैं, मैं शून्य हूं... प्रेमी फ़क़ीर होते हैं. प्रेमी धन कमा नहीं सकता; कमा भी ले, तो...
Read moreDetailsआर्थिक मंदी : समाजवादी अर्थव्यवस्था का मुकाबला पूंजीवादी अर्थव्यवस्था कभी नहीं कर सकता मौजूदा व्यवस्था के रहते, हमारे देश में...
Read moreDetailsदेश चाहे जिसको सौंप दिया, घर बचा लीजिये, आख़िर बच्चे तो आपके हैं न ... ! 1757 में प्लासी की...
Read moreDetailsअमेरिका से लौटते ही नरेंद्र मोदी चुनावी मोड में आ गए... (कार्टून : हेमन्त मालवीय) राम अयोध्या सिंह मिस्र होते...
Read moreDetailsसमान नागरिक संहिता : भई गति सांप छछूंदर केरी ! कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ किसी देश का...
Read moreDetailsतुम मर जाओ जेपी... क्या आप जानते हैं कि जेपी के कंधों पर सवार होकर आने वाली जनता सरकार, जेपी...
Read moreDetailsब्रतानिया हुकूमत का चरण वंदना करने वाले आज हमें राष्ट्रवाद का उपदेश दे रहे हैं संजय कुमार सिंह इस 8...
Read moreDetailsवी. पी. सिंह : जो न अपने घर का रहा और न ही घाट का ओबीसी के लिए आरक्षण लाने...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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