लाल तंबू के नीचे जब होश आया तो मैंने अपने आजू बाज़ू दोनों बिस्तर में पड़ी दो लाशों को देखा...
Read moreDetailsमेरी पुरानी डायरी के आख़िरी पन्ने पर दर्ज़ आख़िरी गीत तुम्हें ऑनलाइन नहीं भेजना चाहता था इसलिए उसे फाड़ कर...
Read moreDetailsउससे किसी लड़की ने प्यार नहीं किया ये और बात है कि उसने कई लड़कियों से प्यार किया उन्हें प्रपोज...
Read moreDetailsजो इंसान इंसान के लिए खड़ा नही होगा वो कभी देश के लिए खड़ा नही होगा क्योंकि देश के लिए...
Read moreDetailsमेरे लोगो अपने भीतर झांको अपनी ताकत पहचानों तुम तब भी थे जब राजा नहीं था तुम तब भी रहोगे...
Read moreDetailsतुम मुझे याद भी करोगी... तुम मुझे याद भी करोगी तो हमेशा ग़लत कारणों से क्योंकि मुझे सही वक़्त पर...
Read moreDetails1. क्रान्ति बीसवीं सदी ने कई क्रांतियां देखीं पर 21वीं सदी ने अब तक एक भी क्रांति नहीं देखी है...
Read moreDetailsगुरू घंटाल न जाने कब तक जिन्दा रहेगा और न जाने कब तक अज्ञान का घंटा बजाता रहेगा जिसके शोर...
Read moreDetails1. हे राम हे राम अब यहां क्या है तुम्हारा काम ? अब किसका प्रतिशोध लेने आएं हो ? अब...
Read moreDetailsतय है लड़ाई तो है लेकिन लड़ने वाले लड़ाकों की तादाद कितनी है लड़ाई की खबर ठीक से फैली नहीं...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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