कुछ सूखे पत्ते बचे हैं इस सूखे हुए दरख़्त पर इसके पहले कि वे उड़ जाएं आंधियों में चलो चुन...
Read moreDetailsमेरे हाथ पैर नाक नक़्श बदन और दिमाग़ बिल्कुल तुम्हारे जैसे हैं लेकिन मेरी थाली अलग है एक दिन तुम्हारी...
Read moreDetailsदेखते देखते उसका भोला भोला हंसता हुआ चेहरा सख़्त होता गया शरीर का रोम रोम तीखे नाख़ून बन गये सर...
Read moreDetailsअकेले कभी मत चलो ऐसा मेरी मां कहती है अगर कोई साथ नहीं चल रहा है तो रूक जाओ और...
Read moreDetailsइस देश का नाम उनके पूर्वजों ने रखा भारत उनके ही किसी पूर्वज के नाम पर जिसे मै भी जानता...
Read moreDetailsदेवताओं को माला मत पहनाओ देवताओं के हाथों माला मत पहनो गंधर्व विवाह की यह प्रथा भीम के बल को...
Read moreDetailsअगर इस देश का संविधान गरीबों ने बनाया होता तो सबसे पहले वे रोटी पर कानून बनाते कि कोई इसके...
Read moreDetailsन्यायधीशों ने अपनी आंखों पर बिल्कुल पट्टी नहीं बांध रखी आलीशान हवाई यात्राएं राज्यसभा की सदस्यताएं और मंहगे विदेशी सैर...
Read moreDetailsवह एक तूफानी साल. आंधी ने सारे देश को अपनी चपेट में ले लिया. बादल बिखर गए तूफान टूट पड़ा...
Read moreDetailsसेपियंस जम्बू द्वीप में आ कर चार प्रजातियां हो गयीं होमो सेपियंस की भी होमो बामनिस होमो क्षत्रियस होमो वैश्येटस...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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