फिलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की पांच कविताएं 1. आदमी के लिए उन्होंने उसका मुंह कपड़ा ठूंसकर बंद कर दिया उसके...
Read moreDetailsवो बच्चों के काले लिबास से डर जाता है वो तानाशाह है खुद की परछाईं से डर जाता है. खरीदता...
Read moreDetailsकैसे हो सकता है कि लोग अपने घरों में बंद कर दिए जाएं और कवि, कवि ही रहे ? थोड़ी...
Read moreDetailsमुक्ति में ही प्रेम है वह कलकल बहती नदी थी निष्छल प्रेम से भरी, उन्मुक्त प्रेम में उसने अपनी मुक्ति...
Read moreDetailsजब मैंने मोटर साइकिल पर रखकर बम फोड़ा जिसमे दर्जनों इंसान मारे गए लेकिन मैं डरा नहीं क्योंकि इस आतंकी...
Read moreDetailsअगर वो मेरी बेटी होती तो उसकी टूटी हुई रीढ़ की हड्डियों पर कोई कविता नहीं लिखता अगर वो मेरी...
Read moreDetailsएक युद्ध जारी है आप बिना मेहनत किये अमीर बन जाते हैं मेहनतकश मजदूर किसान कड़ी मेहनत के बाद भी...
Read moreDetailsभगत सिंह भगत सिंह जब मौत तुम्हारे सामने खड़ी तुम्हारा इंतजार कर रही थी तब तुम लेनिन से बात कर...
Read moreDetailsराज्य हमारी मां नहीं है और नहीं हम उसके बच्चे है कि सिर्फ हमारे रो देने भर से वो हमें...
Read moreDetailsउन्नाव के ईत्र और लाल भारतीयों के लहू में प्रतिस्पर्धा के शुभ मुहूर्त पर वे मुझे अनायास ही ढूंढते हैं...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.