मेरी कविता तुम्हें पाने का एक बेसुरा प्रयास भर है कहानियां बनती हैं और खो जाती हैं किरदार बनते हैं...
Read moreDetailsवक्त आ गया है साथी... वक्त आ गया है साथी हम अब लेनिन और माओ बनें और वैसे ही अपने...
Read moreDetailsस्स्स... देवतागण सो रहे थे ! जब उस लड़की की उन्होंने काट डाली जीभ ! जलाया था उन लोगों ने...
Read moreDetailsकटघरे में खड़े सुकरात... कटघरे में खड़े सुकरात को जब जहर पिलाने का आदेश दिया जा रहा था तो कई...
Read moreDetailsनिराश नहीं हूं प्रिय न ही है तुमसे शिकायत कुछ ही दिनों में जी लिया पूरा जनम हमने साथ निभाने...
Read moreDetailsअंधी सड़कें नहीं देख पाती शार्क के खुले जबड़े आदमी मच्छी के कांटे सा फंसा हुआ है उसके नुकीले दांतों...
Read moreDetailsपड़ी हुई जमी हुई राख को धीरे-धीरे कुरेदना अच्छा लगता है मन को लगता है मिल रही है जीवन दृष्टि...
Read moreDetailsक्या मेरे शब्द बस तुम्हारी यादों की आग के जलावन हैं क्या तुम्हारा मन विस्मृति से भरा मात्र एक आकाश...
Read moreDetailsएक दिन एक पूर्णिमा की दूधिया रौशनी के भीतर मैंने उसे प्रस्ताव दिया कि वह जिस बेजोड़ तरीके से स्त्री-पुरुष...
Read moreDetailsप्रेम की सबसे खूबसूरत कविता : सुनो ना...♥️ सुनो ना...♥️ मन करता है, तुम्हे एक रोमांटिक सी रिस्पेक्ट दूँ... तुम्हें...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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