तुम हमें अर्बन नक्सल क्यों कहते हो ? क्या तुम यह सोचते हो कि हमें अर्बन नक्सल कह देने भर...
Read moreDetailsकिंचित परिवर्तन सुधार, संशोधन, दिलासा कुछ नही होते हैं किंचित सुधारवाद थोड़ी सी मलहम होता है खूब लतियाओ फिर खुद...
Read moreDetailsऔरत का आग से पुराना नाता है औरत का आग से पुराना नाता है उतना ही पुराना जितनी कि आग.....
Read moreDetailsमेरी नाक अमूल्य है. कांग्रेसी पिता मानते हैं कि नेहरू की नाक भी राष्ट्रीय बुर्जुआजी के सेवा-भाव में इसी तरह...
Read moreDetailsफिजी में हज करके लौटे हिंदी के हाजी मौलानाओं ने दिया है हिंदी के पक्ष में बयान थी मेरी अलां...
Read moreDetailsकवि जब तमाम छल ढापे तोपें जा रहे भाषा के प्रपंच से उजागर हुए सत्य पर भी बरस रहा हो...
Read moreDetailsसुनसान पड़े खंडहर केे बचे हुए अकेले दरवाजे पर सांकल चढ़ाकर गुम हो गये सपने किसी बियाबान में अकविता बनती...
Read moreDetailsविनोद शंकर प्यार में मेरी कामना बस यही रही की तुम सिमट न जाना मुझ तक और मैं तुम तक...
Read moreDetailsमैं कवि हूं ! कविता रचता हूं ! कविता पढ़ता हूं ! यह रोजगार है मेरा यह पेशा है मेरा...
Read moreDetailsजीतेगा तो वही जिसमें क्लियर्टी हो जो क्लीयर नहीं है जीतेगा भी तो उसे खो देगा बहुत जल्दी मोहन भागवत...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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