दस हज़ार का कर्ज़किसान सेआत्महत्या करवाता है एक हज़ार रुपए का कर्ज़आदिवासी कापरिवार बिकवाता है दस हज़ार करोड़और उससे अधिक...
Read moreDetailsशाम का ख़ाली कनस्तर पैर पटकता है सड़क पर एक ज़िद्दी बच्चा मचल गया है मेला देखने को उसे नहीं...
Read moreDetailsएक दिन पीले पड़ते पत्तों ने कोंपलों से कहा, हमारे विदा लेने के दिन आ रहे हैं तुमलोग जब हरियाओगे...
Read moreDetailsडोम का बच्चा समा जायेगा संकरे मैनहोल में आकंठ पांक में डूबकर खोल देगा जाम स्वतंत्र कर देगा गंदे जल...
Read moreDetailsबीएचयू की लडकियां यही जज्बा यही तेवर यही लाठी डंडा अब न्याय दिलाएंगे इसी से मनचलों के होश ठिकाने आयेंगे...
Read moreDetailsतीज-व्रत रखतीं धान-पिसान करती थीं ग़रीब की बीवी गांव भर की भाभी होती थीं कैथरकला की औरतें गाली-मार ख़ून पीकर...
Read moreDetailsकिसकी है जनवरी, किसका अगस्त है ? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है ? सेठ है, शोषक है,...
Read moreDetailsस्तालिन स्तालिन अभी ज़िंदा है हमारे दिल में हर क़दम एक नया अज़मे-जवां लेके चलो ज़िन्दगानी के ख़ज़ाने कहीं लुट...
Read moreDetailsएक हिमालय दो पहाड़ी देखे हैं अक्सर दुखती रग पर हाथ धरने वाले देखा पहली बार दुखते दिलों पर मरहम...
Read moreDetailsचमत्कारों से घिरा पुरूष उन दिनों पुरूष नहीं था महज एक इंसान था बाढ़, तूफान उसे डराते थे, तो गुनगुनी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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