मंत्रीगण हरदम कहते रहते हैं जनता से कि कितना कठिन होता है शासन करना बिना मंत्रियों के फसल ज़मीन में...
Read moreDetailsमैंने लोहे का चांद निगला है वो उसको कील कहते हैं मैंने इस औद्योगिक कचरे को, बेरोज़गारी के दस्तावेज़ों को...
Read moreDetailsमैंने अपने धर्म के नारे लगाए उसने अपने धर्म के मैंने अपने भगवान का झंडा उठाया उसने अपने भगवान का...
Read moreDetailsअमेरिका अमेरिका से जापान जापान से परेशान है और एक हम हैं वहीं जाने पर तुले हैं आत्महत्या करने के...
Read moreDetailsजो रास्ता चलने का है उस पर न यादव जी चलते हैं न गुप्ता जी शर्मा जी की तो बात...
Read moreDetailsतुम अक्सर भूल जाती हो तुम स्त्री हो तुम सपने देखने लगती हो सुख के तुम उड़ान भरने लगती हो...
Read moreDetailsवृन्दावन में सबसे पहली विधवाएं कौन सी आईं थी ? कहीं कोई उल्लेख नहीं कोई प्रमाण नहीं लेकिन जाने क्यों...
Read moreDetailsजहां कम्युनिस्ट पार्टी का दफ़्तर था चाय की दुकान है चौराहे पर जहां पार्क था हनुमान मंदिर है नमाज ही...
Read moreDetailsएक पेड़ जो बन गया था दरख्त जिसपर चिड़ियों का था बसेरा , और भी कई जीवों ने डाला हुआ...
Read moreDetailsसबसे पहले मैं माफ़ी मांगता हूं हज़रत हौव्वा से मैंने ही अफ़वाह उड़ाई थी कि उसने आदम को बहकाया था...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.