जैसे लोहे का स्वाद घोड़े से पूछो वैसे ही रोटी का स्वाद भूखे से पूछो छत का स्वाद बेघर से...
Read moreDetailsजेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जाएगी वो सुब्ह कभी तो आएगी इन काली सदियों के सर से...
Read moreDetailsसबसे ताकतवर लोग सबसे कमजोर लोगों से लड़ रहे हैं. सबसे ताकतवर लोग हंसते हंसते पागल हो रहे हैं. सबसे...
Read moreDetailsकामरेड नारायण सान्याल दादा, तुम जैसे लोग मरते नहीं लहू में उतर जाते हो प्रवाह बन कर दादा तुम थे...
Read moreDetailsसभ्यता की पहली ईट उन्होंने ही रखी थी उनके सख्त हाथों ने उकेरे थे दुनिया के रास्ते उनके आने भर...
Read moreDetailsमूल्यों के मरने पर जनमती हैं मूर्तियां अबकी बारी आपकी प्रभु! सरयू तट स्थापित होंगे रुपए दो सौ करोड़ में...
Read moreDetailsआज उसने उससे कह ही दिया एक असहमति के बाद तुम मेरी रखैल... वो सिहर गयी टूट गयी बिखर गयी...
Read moreDetailsएक अजब खबर आई है गिद्ध कम होते जा रहे हैं ! अनुमान लगाया जा रहा है कि वे आदमी...
Read moreDetailsसीमा 'मधुरिमा' खेली खायी औरत हां यही कहा जाता रहा उसे जिसने ठान लिया था समाज के रीति-रिवाजों को ना...
Read moreDetailsसीमा 'मधुरिमा' वो तिलमिलायेंगे ज़ब ज़ब उठाओगी उन पर ऊंगली वो तुम पर चिल्लायेंगे तेज आवाज़ में जिससे दब जाए...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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