अगर मेरे पास रिवाल्वर होता तो क्या होता ? पुलिस की लाश होती और मैं आजाद होता…
Read moreDetailsविद्रोह के हर कदम उठने पर सलाह दी जाती है कि शांति बनाये रखो, सब ठीक हो जायेगा लेकिन ज्ञात...
Read moreDetailsगंगा में बह रही युवक की लाश कह रही है हमारी हत्या हुई ! ऑक्सीजन बिना तड़प कर मरी सारी...
Read moreDetailsवो डरते हैं कामरेड ! तमाम कायदे कानून तोड़ने से आपके संघर्ष को जुवां पे लेने से आपका त्याग संघर्ष...
Read moreDetailsहोश में आये तो जाना कि हम होश में नहीं हैं हमें संखिया की बुरी लत है होश में होते...
Read moreDetailsइस बार शाम फिर से सुर्खियों में है और जब जब शाम सुर्ख़ियों में होती है पिचके हुए गुब्बारों से...
Read moreDetailsकुछ लोग मुझे इसलिए छोड़े कि मैं उनके जैसा उनके जितना उतना अच्छा नहीं था वे लोग मुझे ज्यादा छोड़े...
Read moreDetailsइकहरे शब्द नगाड़ा पीट रहे हैं ढोलकिया की पुकार सुनकर माँदर की थाप पर नाच उठता है झरते हुए अमलतास...
Read moreDetailsजो सबूत थे काफी नहीं नहीं थे दोष को दोष साबित करने के लिए सदी जब भी निचुड़ती है कोई...
Read moreDetailsरेत में लहराती है समुद्र की अथाह संभावना सूखे भोजपत्र पर क्या लिखूं मौसम के नाम अंधेरे की छाती से...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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