मर गया आदमी भी तब तक नहीं मरता जब तक सरकार उसकी मृत्यु का प्रमाणपत्र न दे दे आदमी जिंदा...
Read moreDetailsहम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े...
Read moreDetails1. नंगापन कहां से लाती हो इतना नंगापन ? ये अधखुली छातियां तीन चौथाई जांघें पतली लेस के उपर नीचे...
Read moreDetailsआज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल...
Read moreDetailsसुजम्बर सम्भव मैं और मेरी पार्टी का खुलासा ! (कृपया मुझे पहचानो) आप किस पार्टी से हैं ? तुमने तो...
Read moreDetailsएक आवारा गोली के शिकार बनने के पहले मुझे अनगिनत गोलियों का निशाना बनाया गया था और, हर बार मैं...
Read moreDetailsसंभव हो तो आ जाओ मैं वेट कर रहा हूं मानसून के धीमे होने तक यही रुकूंगा अपना छाता लेते...
Read moreDetailsसोमालिया वह नहीं जो लूट लेता है ज़हाजों के ज़हाज समंदर के खतरनाक सीने पर सोमालिया वह भी नहीं जहां...
Read moreDetailsभूख पुरानी नहीं पड़ती बासी रोटी की तरह भूख से सनी कविताएं भी डेग डेग पर गुंथी रहती हैं तुम्हारे...
Read moreDetailsलोकल ट्रेन से उतरते हमने सिगरेट जलाने के लिए एक साहब से माचिस मांगी, तभी किसी भिखारी ने हमारी तरफ...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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