आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के जन्मदिन के अवसर पर उपन्यास पुनर्नवा का एक अंश देवरात साधु पुरुष थे. कोई नहीं जानता...
Read moreDetailsसोमवार को स्नान के बाद इस कथा को पढ़ें ! बाप अकेला रहता था. बेटे उससे दूर एक शहर में...
Read moreDetails'मौलाना साहब, जन्नत में कौन से लोग जाएंगे, हिन्दू या क्रिस्चियन ? मौलाना गुस्से में बोले - केवल मुसलमान मैंने...
Read moreDetailsमैं पतिदेव से - 'पता चला, मेरी मित्र रूचि का मित्र अपने कुछ मित्रों के साथ एक शादी से लौट...
Read moreDetailsपडोस के घर में जोर शोर से आवाज़ आयी. दौड़ कर देखने गया. पडोसी की बुढ़ी मां हाथ में डंडा...
Read moreDetails1 वैष्णो देवी की चढ़ाई चढ़ते हुए पास से गुजरती पालकी उठाये 4 निरीह युवकों पर बच्चे की नजर पड़ी....
Read moreDetails'तुम में जहर नहीं है, इसलिए तुम कमजोर हो !' सांप ने चूहे से कहा. 'जिसके अंदर जहर होता है...
Read moreDetailsएक बार एक गांव में बड़ी महामारी फैली. पूरे गांव को लंबे समय तक के लिए बंद कर दिया गया....
Read moreDetailsदुकानें और मकान ताश के पत्तों की तरह गिर और जल रहे थे. आकाश काला और जमीन लाल हो गई...
Read moreDetailsअच्छे बुरे का बोध किसी रियासत का राजा जानना चाहता था कि उसकी प्रजा कितनी जागरूक है. उसने एक ऐसी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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