Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

डिलीवरी बॉय आपके बाप का नौकर नहीं है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 16, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

डिलीवरी बॉय आपके बाप का नौकर नहीं है...

Shyam mira singhश्याम मीरा सिंह
Zomato से अनुरोध है कि जितनी सहानुभूति उसे अपने ग्राहक की है, उतनी ही सहानुभूति अपने कर्मचारी से भी दिखाए और इस पूरे मामले की लीगल जांच कराए. जब तक जांच पूरी न हो तब तक कामराज को न्यूनतम मज़दूरी देती रहे. जो भी दोषी हों, और जितने भी दोषी हों, ज़्यादा, कम, बहुत ज़्यादा, बहुत कम, वो सब सच बाहर आना चाहिए.

मैंने स्वयं 2 साल तक फूड डिलीवरी का कार्य किया है और मैं यह जानता हूं कि डिलीवरी बॉय को लोग अपना स्लेव ही मानते हैं. अगर आपको कुछ परेशानी हो तब भी वे लोग आपको पांचवीं या आठवीं मंजिल पर बुलाते हैं और वहां पहुंचकर भी वे आपसे थैंक यू तक भी नहीं कहते. फ़िर पानी की क्या बिसात ??? (सिर्फ़ कुछ लोगों को छोड़कर). और इसके बाद भी अगर रेस्टोरेंट की गलती होती है या उनके कारण देर होती है, तब भी वे आपको ही निशाना बनाते है. आप चाहे मर जाएं तेज़ गाड़ी चलाते हुए, मग़र उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता. कई बार तो फ़ोन भी नहीं उठाते, जिसके कारण परेशान होना पड़ता है, जिसके कारण हमारी कमाई पर भी असर पड़ता है. कई बार बेवज़ह इनकी डांट भी सुननी पड़ती है. और कई बार ये इतने इगोस्टिक हो जाते है कि ये हमें अपना ग़ुलाम ही मानने लगते है. ख़ैर कहने को बहुत कुछ है, पर इस बात पर विराम लगाना ही उचित है. बस कुछ लोग मिलते हैं 100 में से 2 लोग, जिन्होंने हमसे पानी का पूछा हो.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

– ऋषभ दीपा चोलकर जी का निजी अनुभव

डिलीवरी बॉय कामराज को काम से निकाल दिया गया है. बंगलौर के कामराज धाराप्रवाह अंग्रेज़ी नहीं बोल सकते, पर दिल भर रो सकते हैं. कामराज जोमैटो के लिए 26 महीने से घर-घर खाना पहुंचा रहे हैं. अब तक उन्होंने क़रीब 5 हज़ार डिलीवरी की हैं, जिनमें उन्हें 5 में से 4.7 रेटिंग मिली है, जोकि सबसे अधिक रेटिंग में से एक है.

NDTV और बाक़ी जगह उनका इंटर्व्यू देखने से भी समझ आ जाएगा कि कामराज असभ्य और अपराधी क़िस्म के आदमी नहीं हैं बल्कि Well-behaved और Well-mannered है, पर सोशल मीडिया इंफलुएंसर की इकतरफ़ा कहानी के चलते कामराज को सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बाद कामराज पर सिवाय फूट फूटकर रोने के कुछ नहीं बचा.

सोचने वाली बात है अगर इतनी ही नौकरियां कामराज के आसपास घूम रही होतीं तो अधेड़ उम्र में बीस-बीस रुपए के लिए घरों पर खाना नहीं पहुंचा रहे होते. कामराज को नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि एक इंफलुएंसर ने दुनिया को वीडियो बनाकर बताया कि डिलीवरी बॉय ने उनके मूंह पर हिट कर दिया है, जिससे उनकी नाक ज़ख़्मी हो गई.

पूरे देश ने एक तरफ की कहानी सुनी और कामराज हम सब की कहानियों में ‘बेहूदे’ हो गए. दूसरी साइड सुनने का वक्त किसी को नहीं. देर सबेर अब दूसरी साइड की कहानी सामने आ रही है, पर डिलीवरी बॉय की औक़ात ही क्या है ? उसकी कहानी सुनने का वक्त किसी को नहीं. कामराज रो रोकर कह रहे हैं कि उन्होंने ‘सोशल मीडिया इंफलुएंसर’ को हिट नहीं किया जबकि वे अपनी ही उंगली में पहनी एक अंगूठी से ज़ख़्मी हुई हैं.

पूरी कहानी ऐसे है कि कामराज खाना लाते समय रास्ते में फंस गए थे, और मैडम जी को सूचित करते रहे कि ‘जाम में फंस गए हैं, प्लीज़ कंपनी से शिकायत मत करना.’ घर पर खाना लेकर पहुंचे तो मैडम जी ने कहा कि ‘नियमानुसार लेट होने पर उन्हें free में खाना चाहिए.’ लेकिन पैसा कटना था उस आदमी की जेब से जो पांच पांच मंज़िल सीढ़ियों पर चढ़कर आपके लिए खाना पहुंचाते हैं इसलिए कि उन्हें बीस-तीस रुपए मिल सकें. पर मैडम जी को उसी के पैसों से पेट भरना था.

कामराज कहते रहे कि मैडम जी शिकायत मत करिए. शिकायत होती है तो उसी की जेब से पैसे कटते हैं. और अपराध भी क्या ? अपराध ये कि रास्ते में जाम में फंस गए, इसलिए टाईम पर खाना डिलीवर न कर सके ? यही गलती थी कामराज की, यही अपराध था उसका. मैडम जी लगातार कंपनी की चैट सपोर्ट से चैट करती रहीं, शिकायत करती रहीं. कामराज मनाते रहे कि मैडम जी शिकायत मत करिए, खाना इसलिए मुफ़्त नहीं दे सकता क्योंकि कैश ऑन डिलीवरी है.

मैडम जी ने अपने घर के आधे बंद गेट के अंदर खाने का पैकेज रख लिया. पैसे न मिलने पर कामराज ने खाने के उस पैकेज को उठाने की कोशिश की. एक तरफ़ मैडम जी, एक तरफ़ कामराज और बीच में दरवाज़ा. यहीं से शुरू हुई कहानी. कहानी जो मैडम जी ने अपनी वीडियो में नहीं सुनाई. ऐसा नहीं है कि कामराज ने ऊंची आवाज़ में बात न की होगी, ऐसा नहीं है कि कामराज ने ग़ुस्सा न किया होगा. किया होगा, इसकी पूरी संभावनाएं हो सकती हैं लेकिन संभावनाएं तो इसकी भी हो सकती हैं कि मैडम जी ने भी जिरह की हो. संभावनाएं तो ये भी हो सकती हैं कि मैडम जी ने भी उसे बेहूदगी से ट्रीट किया हो. हो तो ये भी सकता है कि मैडम जी ने डिलीवरी बॉय को आदमी मानने से ही इनकार कर दिया हो, क्योंकि उसकी औक़ात ही क्या है ? उसे तो फटकारा जा सकता है, उसे तो धिक्कारा भी जा सकता है !

इसी बहस में डिलीवरी बॉय ने मैडम जी से कहा कि ‘मैं आपका ग़ुलाम नहीं हूं.’ यही लाइन शायद डिलीवरी बॉय को नहीं कहनी थी. ग़ुलाम तो वो है. ग़ुलाम उसके वर्ग के करोड़ों लोग हैं जिनकी जगह शहरों के ऊंचे मकानों में रहने वाले मालिक के डॉगी जितनी नहीं है. बहस हुई. जिरह हुई. सही ग़लत, बुरे अच्छे की बहस के इतर. अभी डिलीवरी बॉय का भी वर्जन सुनते हैं.

डिलीवरी बॉय का कहना है कि ‘मैडम जी ने उसके लिए चप्पल उठाई. चप्पल मारते हुए आती मैडम जी से अपने बचाव में जब उसने मैडम जी के हाथ को धक्का देने की कोशिश की तो मैडम जी के हाथ की अंगूठी उनकी नाक में ज़ख़्म कर गई.’ जिसका अनुवाद अख़बारों और सोशल मीडिया में ऐसे हुआ कि अंग्रेज़ी बोलने वाली मैडम को देशी भाषा कन्नड़ वाले डिलीवरी बॉय ने हिट कर दिया है. हम सबने इस खबर पर आंखें नटेरीं, हैश टैग चलाए, ग़ुस्सा हुए, रोष किया और कामराज को नौकरी से निकाल दिया गया.

कामराज जिसकी अम्मा डायबिटीज़ की सिरियस स्टेज पर हैं. कामराज जो घर में कमाने वाला इकलौता है, जिसे इंस्टाग्राम पर क्रीम पाउडर बेचने के बदले पैसे नहीं मिलते, जो सोशल मीडिया पर गोरे रंग वाली फ़ेयर लवली नहीं बेच सकता, जो घर-घर खाना पहुंचा कर हर रोज़ कुछ कमाकर लाता है और घर लाकर बच्चों को खिलाता है, उसी कामराज की नौकरी चली गई.

पर सोचने वाली बात है अगर मैडम जी की स्टोरी में कामराज नहीं था या कामराज की कहानी नहीं थी, तो कम से कम उस जगह पर आप ही अपना कॉमनसेंस रख लेते और एक बार अपना प्रश्न बदलकर अपने आप से ये पूछ लेते कि ‘हो तो ये भी सकता है ? हो तो वो भी सकता है ?’ अगर ऐसा भी कर लेते तब भी आप पूरी कहानी का आधा सा हिस्सा जान जाते. पर कामराज की कहानी कौन सुने ? कौन उसके लिए लिखे ?

Zomato से अनुरोध है कि जितनी सहानुभूति उसे अपने ग्राहक की है, उतनी ही सहानुभूति अपने कर्मचारी से भी दिखाए और इस पूरे मामले की लीगल जांच कराए. जब तक जांच पूरी न हो तब तक कामराज को न्यूनतम मज़दूरी देती रहे. जो भी दोषी हों, और जितने भी दोषी हों, ज़्यादा, कम, बहुत ज़्यादा, बहुत कम, वो सब सच बाहर आना चाहिए.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

बंगाल चुनाव का विश्लेषण – खेल बहुत गहरा है

Next Post

लंच टाइम

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

लंच टाइम

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

डिमोशन-प्रमोशन

August 22, 2024

सारी दुनिया जब विज्ञान के सहारे आगे बढ़ रही है, आरएसएस और भाजपा देश को अंधकार में ले जा रहा है

January 12, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.