Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मंदिरों का अवैध निर्माण और सुप्रीम कोर्ट का रवैया

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 24, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

मंदिरों का अवैध निर्माण और सुप्रीम कोर्ट का रवैयामंदिरों का अवैध निर्माण और सुप्रीम कोर्ट का रवैया

राजधानी दिल्ली की छाती पर देश का सबसे बडा अतिक्रमण और अवैध निर्माण है, अक्षरधाम मंदिर. पूर्वी दिल्ली में यमुना के किनारे करीब 100 एकड भूमि पर गुजराती संत स्वामीनारायण का बना यह स्मारक हर तरह से अवैध और यमुना की बर्बादी में योगदान करने वाला है.

दो दशक पहले 1999 में इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कई पर्यावरण विशेषज्ञों और भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर सवाल खडे किए थे और इसे खतरनाक प्रोजेक्ट करार दिया था, लेकिन मंदिर की राजनीति के चैंपियन रहे तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी के हस्तक्षेप के चलते सारी आपत्तियों और चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया.

इसके निर्माण को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने भी पर्यावरणीय चेतावनियों से तो सहमति जताई लेकिन कई तरह के ‘किंतु-परंतु’ लगाते हुए उसके निर्माण को हरी झंडी दे दी और कहा कि इस निर्माण को नजीर न मानते हुए अपवाद माना जाए.

अब करीब डेढ दशक बाद उसी सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली में तुगलकाबाद स्थित जमीन के एक छोटे से टुकडे पर भक्तिकालीन संत रविदास के दशकों पुराने मंदिर को दिल्ली विकास प्राधिकरण जमीन पर अवैध निर्माण करार देते हुए उसे तोडने के आदेश दे दिया. जबकि जिस समय मंदिर का निर्माण हुआ था, तब दिल्ली विकास प्राधिकरण अस्तित्व में ही नहीं था.

हालांकि रविदासिया समुदाय के लोगों का दावा है कि यह मंदिर 600 वर्ष पुराना है. इस स्थान पर संत रविदास ने कुछ समय विश्राम किया था, इसीलिए उनकी स्मृति में उनके अनुयायियों ने यहां मंदिर का निर्माण किया था. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकारी अमले ने मंदिर ढहा दिया है, जिसकी वजह से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश के रविदासिया समुदाय के लोग बेहद आंदोलित हैं.

एक ही सुप्रीम कोर्ट लेकिन दो मंदिरों को लेकर दो अलग-अलग फैसले. वजह ? एक मंदिर को राजनीतिक सत्ता का उच्चस्तरीय संरक्षण हासिल है लेकिन दूसरे मंदिर के साथ ऐसा नहीं है. एक मंदिर में प्रवेश पाने के लिए लोगों को बाकायदा पैसे चुकाना पडते हैं, जबकि दूसरे मंदिर में प्रवेश के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. यानी एक मंदिर से खाए-अघाए लोगों का धंधा जुडा हुआ है और दूसरे मंदिर से गरीब और वंचित लोगों की आस्था.

अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि देश की न्यायपालिका किसके साथ है और वह कैसी न्याय करती है या फैसले सुनाती है ! ऐसे ही फैसले अदालतों के प्रति आम लोगों के भरोसा को तोडते हैं, उन्हें सडकों पर उतरने और उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर करते हैं और सामाजिक तनाव बढाते हैं.

अनिल जैन, बरिष्ठ पत्रकार

Read Also –

पहलू खान की मौत और भारतीय न्यायपालिका के ‘न्याय’ से सबक
शैडौ ऑफ कास्ट : जातिवाद का जहर
अब आदिवासियों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट
अदालत एक ढकोसला है’
साम्प्रदायिक और जातिवादी कचरे का वैचारिक स्रोत क्या है ?

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

पहलू खान की मौत और भारतीय न्यायपालिका के ‘न्याय’ से सबक

Next Post

आरक्षण पर बहस करवाने वाला भागवत दलितों की स्थिति पर बहस क्यों नहीं करता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

आरक्षण पर बहस करवाने वाला भागवत दलितों की स्थिति पर बहस क्यों नहीं करता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जेबकतरे

July 17, 2022

असंवैधानिक ट्रिब्यूनल : खुल्ला खेल फार्रूखाबादी

March 21, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.