Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

अशोक स्तम्भ को हटाकर मोदी स्तम्भ लगाने के मायने

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 23, 2022
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
अशोक स्तम्भ को हटाकर मोदी स्तम्भ लगाने के मायने
अशोक स्तम्भ को हटाकर मोदी स्तम्भ लगाने के मायने : बांयें मोदी स्तम्भ, दांयें अशोक स्तम्भ

भारत की संविधान सभा में दिया गया जवाहरलाल नेहरू का वह मशहूर भाषण याद कीजिए जो उन्होंने भारत के झंडे को राष्ट्रीय झंडा घोषित किए जाते समय 22 जुलाई 1947 को दिया था. उस दिन नेहरू ने कहा था –

‘हमारे दिमाग में अनेक चक्र आए पर विशेषकर एक प्रसिद्ध चक्र जो कि, अनेक स्थानों पर था और जिसको हम सब ने देखा है, उसने हमारा ध्यान खींचा है – वह है अशोक की प्रमुख लाट के सिरे पर स्थित चक्र और अन्य स्थानों का चक्र.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

वह चक्र भारत की प्राचीन सभ्यता का चिह्न है- वह और भी अनेक बातों का प्रतीक है, जिसको इस काल में भारत ने अपनाया. अतः हमने सोचा कि इस चक्र का चिह्न वहां होना चाहिए और वही चक्र दिखाई देता है. मैं स्वयं तो बहुत प्रसन्न हूं कि किस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से हमने इस झंडे के साथ केवल उस प्रतीक को ही नहीं अपनाया बल्कि एक प्रकार से अशोक के नाम पर भारत के ही नहीं वरन संसार के इतिहास के एक बड़े महान नाम को भी अपनाया.

अच्छी बात है कि झगड़े, फसाद और असहिष्णुता के समय हमारा विचार उस बात की ओर हुआ जिसका प्राचीन काल में भारत हामी था और मैं आशा तथा विश्वास करता हूं कि भूल और त्रुटियां करने पर तथा समय-समय पर निराहत होने पर भी इस समस्त काल में प्रधान रूप से भारत इस विचार का समर्थन करता रहा क्योंकि यदि भारत किसी महान लक्ष्य को न अपनाता तो मेरे विचार से भारत जीवित भी न रहता और न इस दीर्घकाल तक अपनी सभ्यतामूलक परंपराओं को जारी रख सकता था.

वह अपनी सभ्यतामूलक परंपरा को जारी रखने में न केवल सफल रहा, बल्कि परिवर्तन भी करता रहा लेकिन उसके मुख्य सार को उसने सदैव धारण किया है, नई प्रगति तथा नए प्रभाव के अनुसार अपने को ढालता रहा.

भारत की यही परंपरागत प्रथा रही है – वह सदैव नई कलियां और पुष्प खिलाता रहा है – सदैव अच्छी बातों को ग्रहण करता रहा, जो उसे प्राप्त हुई-कभी-कभी बुरी बातें भी ग्रहण की परंतु अपनी प्राचीन सभ्यता के प्रति वह सच्चा रहा.’

रामा शंकर सिंह लिखते हैं –

जवाहरलाल नेहरू का अशोक के प्रति यह लगाव किसी चक्रवर्ती सम्राट से किसी आधुनिक शासक का लगाव नहीं था बल्कि वह एक ऐसे पूर्वज से लगाव था, जो भारत की श्रेष्ठ परम्पराओं को दो हजार वर्ष पहले पल्लवित-पुष्पित कर चुका था.

वास्तव में सम्राट अशोक के अभिलेख इस बात की गवाही देते हैं कि वह अपने समय को बदल देना चाहता था, हिंसा और तामझाम से भरे समाज को एक नैतिक भावबोध प्रदान करने की उसकी इच्छा थी. यह इतिहासकारों के बीच विवाद का विषय हो सकता है कि वह ऐसा करने में कितना कामयाब रहा लेकिन इस पर कोई दो राय नहीं है कि उसने अपने समय को बदलने की पूरी कोशिश की.

और यह बदलाव कोई एकरैखिक नहीं रहा था जिसमें किसी ‘समरूप प्रजा’ का निर्माण किया गया हो. ‘धम्म’ की शिक्षा देने के बावजूद लोगों के पूर्ववर्ती विश्वास बने रहे और सम्राट ने खुद कहा कि लोगों के अपने विचार विश्वास बने रहें और वे एक दूसरे की निंदा न करें. उसने वाक्-संयम को बढ़ावा दिया और कहा कि दूसरे पाषण्डों (संप्रदायों) को निंदित और हल्का करने के प्रयास नहीं किए जाने चाहिए.

आज भारत एकबार फिर अपने समय को बदल देना चाहता है. हिंसा और तामझाम से भरे समाज को एक नैतिक भावबोध प्रदान करने के बजाय समाज को हिंसक, नफरत से लबरेज और मनुस्मृति आधारित गुलामी के दलदल में धकेल देना चाहता है. और इस तमाम तामझाम का नेतृत्व कर रहा है आरएसएस का ऐजेंट नरेन्द्र दामोदर दास मोदी, जिसे लोगों ने प्रधानमंत्री पद पर बैठाया, यानी भारत की धरती पर एक बार फिर मोदी के रुप में पुष्यमित्र शुंग ने भारत की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है.

जिस प्रकार पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य सम्राट वृहद्रथ मौर्य की हत्या कर मगध साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया था और मानवद्रोही मनुस्मृति  के आधार पर ऊंच-नीच, छुआछूत से भरा समाज बनाया था, आज एक बार फिर नरेन्द्र मोदी के रुप में पुष्यमित्र शुंग ऊंच-नीच, छुआछूत, नफरती, हिंसक समाज का निर्माण कर रहा है. और उसी का प्रतीक है नफरती बिष्ठा पर स्थापित विकृत हिंसक जानवरों की स्थापना नया पुष्यमित्र शुंग नरेन्द्र मोदी ने किया है.

यह ब्राह्मणवादी शुद्र नरेन्द्र मोदी ने अशोक द्वारा स्थापित मूल अशोक स्तम्भ को बदलकर अपने नफरती हिंसक स्वभाव के अनुरूप सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत 11 जुलाई को संसद भवन की छत पर जिस ‘अशोक स्तंभ’ की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया, वह सम्राट अशोक के सारनाथ वाले मूल स्तंभ से न केवल पूरी तरह अलग है बल्कि पूरी तरह विकृत भी कर दिया है.

सम्राट अशोक ने करीब 250 ईसा पूर्व सारनाथ में मूल अशोक स्तंभ बनवाया था. यह अशोक स्तम्भ चुनार के बलुआ पत्थर को काटकर बनाया गया था. यह एकाश्म यानी एक ही पत्थर से तराशकर बनाया गया था. शेरों की मूर्ति जिस प्लेटफॉर्म पर लगी है, उस पर एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोड़ा, एक सांड और एक शेर की उभरी हुई कलाकृति है.

दैनिक भास्कर से बात करते हुए महेश प्रसाद कहते हैं कि संसद में लगे शेर का जबड़ा पिचका हुआ और मुंह ज्यादा खुला हुआ है. किनारे से भी देखें तो उसके दांत ज्यादा निकले हुए हैं, जबकि मूल स्तम्भ के जबड़े चौड़े हैं, उस पर की गई पॉलिश उसे बेहद शानदार बना देती है. नए स्तंभ को देखें तो लगता है इसे बनाने वाला कलाकार अशोक के ‘धम्म’ की अवधारणा से परिचित नहीं है.

उनके मुताबिक मूल स्तंभ में जो शेर हैं, उनमें गंभीरता है. उनके चेहरे की बनावट, उनकी आंखों में शांति नजर आ रही है, जबकि संसद में लगे शेर आक्रामक भाव में नजर आते हैं. इन्हें देखकर लोगों में डर का भाव आ सकता है.

मेटल कास्टिंग के एक्सपर्ट और मुंबई स्थित जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े भूषण वैद्य ने बताया –

किसी भी प्रतिमा की रेप्लिका बनाने का एक स्पेसिफिक तरीका होता है. पत्थर की प्रतिमा को मेटल रेप्लिका में हम करीब 99% तक हूबहू कॉपी कर सकते हैं. नए अशोक स्तंभ को अपने हिसाब से इम्प्रोवाइज्ड करने का प्रयास किया गया है. इसमें आर्टिस्ट ने ऑब्जेक्ट का प्लेसमेंट सही जगह किया है, लेकिन उसे बनाया अपने ढंग से है. यह सारनाथ की प्रतिमा का 20% कॉपी भी नहीं है. मौजूदा समय में 3D तकनीक का इस्तेमाल कर इसे पूरी तरह से कॉपी किया जा सकता था, लेकिन इसमें उसका भी इस्तेमाल नहीं हुआ है.

प्रख्यात कार्टूनिस्ट हेमन्त मालवीय लिखते हैं

ये मोनोमेन्ट भद्दा और बेहूदा होने के साथ साथ अधूरा भी है. पैरों के मोटे मोटे ज्वाइंट तक दूर से स्पष्ठ दिख रहे हैं. काम में फिनिशिंग नहीं है. किसी अनाडी जुगाड़िये कलाकार ने शायद किसी जल्दबाजी बनाया है. सम्भव है इसे मान्य करने वाले अधिकारियों ने मोटा कमीशन खाया हो. इसकी कीमत कितनी होगी यह भी नहीं बताया गया है.

जब मूल कृति मौजूद हैं. उसके चेहरे पे सौम्यता का भाव भी मौजूद हैं तब इसकी कमियों को तो गिना ही जायेगा. चलिए जिस इसे किसी ने बनाया है तो कम से कम इसकी रेप्लिका में फिनिशिंग तो होता ? निहायत ही घटिया बना है. जैसा अमृतकाल चल रहा है, वैसे ही भाव है, जिसमें सब कुछ निगल जाने जुगाड़ की झलक मिल रही है. यह अब उस बात का प्रतीक भर है देख लो दुनिया वाले कैसे 2000 साल में हम भारतीयों ने अपनी मूर्ति कला को रसातल में पहुचा दिया.

अशोक के शांत, सौम्य और शक्ति का प्रतीक अशोक स्तम्भ मोदी के खूंखार, हिंसक और कायरता का प्रतीक बन चुका यह मोदी स्तम्भ असलियत में भारत की करोड़ों जनता और उसके प्राचीन संस्कृति का खुला मजाक है. इस हास्यास्पद हिंसक मोदी स्तम्भ को जितनी जल्दी हो उखाड़ फेंककर ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बचाया जा सकता है, वरना जिस तरह नफरत के कुत्तों की सवारी की जा रही है, वह देश को समूची दुनिया में हास्यास्पद तो बनायेगा ही, अखंड भारत का सपना दिखाने वाला यह संघी और उसके ऐजेंट नरेन्द्र मोदी असल में भारत को हजारों टुकडों में बांट देगा.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

सुखदेवराज की जबानी, आजा़द का बलिदान

Next Post

बैंकों का सबसे बड़ा कर्जदार है, दुनिया में चौथे नंबर का अमीर अडानी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बैंकों का सबसे बड़ा कर्जदार है, दुनिया में चौथे नंबर का अमीर अडानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

डॉ. सुधाकर राव : सुरक्षा किट की मांग पर बर्खास्तगी, गिरफ्तारी और पिटाई करनेवाली पुलिस और मोदी सरकार मुर्दाबाद

May 18, 2020

लॉकडाऊन के बीच कुछ अच्छी खबरें

April 11, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.