Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

लॉकडाऊन के बीच कुछ अच्छी खबरें

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

लॉकडाऊन के बीच कुछ अच्छी खबरें

विनोद वर्मा, पत्रकार

दुनिया को कोरोना ने भयभीत कर रखा है. हर व्यक्ति आशंका से कांप रहा है कि पता नहीं कल क्या होगा. कारोबार ठप्प है. उद्योगों में ताले लटक रहे हैं. कल तक हम ‘लॉक-डाउन’ से शायद परिचित न रहे हों लेकिन अब बच्चे तक जानते हैं कि ये क्या है.

लेकिन बुरे के दौर में सब कुछ बुरा नहीं है. दुनिया भर से अच्छी ख़बरें भी आ रही हैं. कोरोना की मार से कराह रहे इटली, स्पेन, अमरीका से और दिल्ली, बंगलौर, मुंबई, रांची और रायपुर से भी.

ये अच्छी ख़बरें हैं प्रदूषण के कम होने की. आसमान के फिर से नीला दिखाई देने की. रात में चंद्रमा के साथ तारे देख पाने की. नदियों से साफ़ होने की और जंगली पशुओं के शहरों तक पहुंच जाने की.

विभिन्न समाचार पत्रों व वेबसाइट पर प्रकाशित ख़बरों न्यूज़ एजेंसी की ख़बरों और सोशल मीडिया पर आई ख़बरों में जो कुछ पढ़ने को मिला, उसकी एक झलक देखिए –

  • गंगा साफ़ हो गई है. कानपुर में भी और वाराणसी में भी.
  • दिल्ली में हवा साफ़ हो गई है. प्रदूषण का स्तर 71 प्रतिशत तक कम हो गया है.
  • यमुना के पानी में आमतौर पर दिखने वाला झाग कम हो गया है.
  • नोएडा सेक्टर-18 में नील गाय दिखी.
  • सिक्किम की राजधानी गंगटोक में हिमालयन भालू शहर तक आ गया.
  • देहरादून तक हाथी आ पहुंचे.
  • केरल के कोझिकोड में आबादी वाले इलाक़े तक दुर्लभ मालाबार बिलाव-कस्तूरी पहुंचा.
  • ओडिशा के समुद्र तट पर पहली बार लाखों कछुए दिन में प्रजनन करते देखे गए.
  • गौर (भारतीय बायसन) कर्नाटक में दिन में सड़कों पर देखा गया.
  • मुंबई की सड़कों पर मोर दिखा.
  • बिहार में बख़्तियारपुर में नील गाय का झुंड खेतों के बीच से गुज़रता दिखा.
  • पटना में एयरपोर्ट बेस के पास तेंदुआ दिखा.
  • गाज़ियाबाद पिलखुआ में अस्पताल में बारहसिंगा दिखा

लगभग यही स्थिति विदेशों में भी दिखाई दे रही है –

  • ब्रिटेन के उत्तरी वेल्स में शहरी इलाक़ों में पहाड़ी बकरियां दिखीं.
  • रॉमफ़र्ड, इंग्लैंड में हिरण शहरी बस्तियों में दिखे.
  • वेनिस, इटली की प्रसिद्ध नहरों में समुद्री पक्षी तैरते दिख रहे हैं, पानी भी साफ़ हो गया है.
  • सैंटियागो, चिली में शहर में प्यूमा (पहाड़ी बिलाव) दिखा.
  • पेरिस, फ़्रांस में सेन नदी से निकलकर बत्तखों का झुंड सड़कों पर घूमता दिखा.
  • लंदन के मिडिलसेक्स इलाक़े में शहरी बस्ती के बीच लोमड़ी घूमती हुई दिखी.
  • त्रिंकोमाली, श्रीलंका में बाज़ार में बारहसिंगा दिखाई पड़ा.
  • नारा, जापान में व्यस्त रहने वाली सड़क पर हिरण दिखाई पड़ा.
  • वैंकुअर, कनाडा में समुद्री तट पर ऑरका व्हेल दिखाई देने लगी.
  • कैगलियारी, इटली में डॉल्फ़िन दिखने लगीं

हालांकि करुणा और पीड़ा के समय में प्रकृति और पर्यावरण की बात करना थोड़ा अटपटा सा लगता है लेकिन जो हो रहा है वह यही है.

कुछ बरस पहले एक कार्यक्रम में कवि, समीक्षक और संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी ने बहुत पीड़ा के साथ कहा था कि पिछले कुछ दशकों में हम पृथ्वी को लगातार दुनिया की ओर ले गए हैं. यह बात कम लोगों को समझ में आई थी. वो इसलिए कि हमने दुनिया को पृथ्वी का पर्यायवाची मान लिया है. एक कवि ने इसे अलग तरह से देखा. वास्तव में पृथ्वी और दुनिया को इसी नज़रिए से देखा जाना चाहिए.

इस बात से कौन इनकार कर सकता है कि हमने अपनी अपनी सुविधा के लिए पृथ्वी के विनाश में कोई कसर नहीं छोड़ी है. हमने उसके साथ दुराचार किया है. हमने अपनी नदियों का सत्यानाश कर लिया. खनिज उत्खनन के नाम पर जंगल और पहाड़ ख़त्म कर दिए. हरे-भरे पहाड़ों को नंगा कर दिया. जो जंगल हमारे पास बचे हैं, उनका स्तर (क्वालिटी) भी ख़राब हो गया है. शहरों में इतना प्रदूषण है कि लोग तरह-तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं.

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2020/04/92862668_172257210499387_4586254228577583104_n.mp4

लॉकडाऊन के कारण यमुना की साफ जलधारा

जो लोग अधेड़ हो चुके हैं वो समझ सकते हैं कि अपने पशु पक्षियों के साथ हमने क्या किया है. बाघ, शेर, तेंदुआ, हाथी, व्हेल, शार्क को छोड़ दीजिए अब तो शहरों में गौरैया और कौव्वे तक नहीं दिखते.

करोना संकट की वजह से लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं या उन्हें नहीं निकलने दिया जा रहा है. वाहन नहीं चल रहे हैं. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग न धुंआ उगल रहे हैं और न प्रदूषित पानी नदियों में बहा रहे हैं तो अंतर दिखने लगा है.

जीव-जंतुओं को एकाएक लगने लगा है मानों यह पृथ्वी उनकी भी है. वरना तो मनुष्यों ने पृथ्वी और प्रकृति पर इतना एकाधिकार कर लिया है कि शेष जीव-जंतु हाशिए पर भी नहीं जी पा रहे हैं. हमारे देखते ही देखते कितने पशु और कितने पक्षी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए. जंगल के स्वच्छंद जीवों को हमने चिड़ियाघरों तक सीमित कर दिया.

कोरोना महामारी का समय जीव-जंतुओं को नए समय की तरह लग रहा है और ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ जीव-जंतुओं को ही ऐसा लग रहा है. मनुष्यों को भी लग रहा है. वे भी सांस लेते हुए समझ रहे हैं. वे भी आसमान की ओर देखते हुए महसूस कर रहे हैं. यह दुनिया के पृथ्वी की ओर लौटने का समय है. अल्पकाल के लिए ही सही.

Read Also –

माजुली द्वीप के अस्तित्व पर मंडराता संकट हमारे लिये एक चेतावनी है
आरे फॉरेस्ट का सफाया करने पर आमादा हुई
क्या कोठरी में बंद जिंदगी हिप्पी संस्कृति को जन्म देगी ?
मरती नदियां और बोतलबंद पानी के खतरे
लुप्त होती हिमालय की जलधाराएंं

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

कोरोना संकट की आड़ में ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर एफआईआर

Next Post

हाई रिस्क जोन के शगूफे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

हाई रिस्क जोन के शगूफे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कुत्ते की मौत मर गये महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण

November 18, 2019

अतीत में महान होने के नशे में डूब जाना गुलामी का रास्ता खोलता है

May 27, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.