Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मीराबाई के मौत का रहस्य

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 6, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मीराबाई के मौत का रहस्य
मीराबाई के मौत का रहस्य

राजपरिवार की एक नई नवेली बहू रात दिन कृष्ण भक्ति में लीन रहते देख परिवार को यह नागवार गुजरा, मीरा के देवर विक्रमादित्य ने मीरा को मारने के लिए जहर प्याला तक पिलाया गया. मीराबाई कम उम्र में ही विधवा हो गई थी. मीरा को पति की चिता पर सती होने के लिए बाध्य किया गया लेकिन मीरा ने सती होने से मना कर दिया.

पति का अंतिम संस्कार भी मीरा की गैरमौजूदगी में किया गया. मीरा ने अपना विधवा जीवन कृष्ण भक्ति धारा की रचनाओं में बिताया. हालांकि मीराबाई बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थी, बाद में गुरु रैदास ने मीरा की काव्यगत रचनाओं के प्रति उत्कंठा को देख अपने आश्रम में ही उन्हें प्रशिक्षित किया.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

भारतीय इतिहासकारों से लेकर साहित्यिकारों तक ने मीरा का जीवन चित्रण हमेशा ही ‘मीरा को भक्ति के पागलपन तक’ जैसा चित्रित करने की कोशिश की. वास्तविकता ये थी कि भारतीय अध्यात्म की कमान हमेशा ही ब्राह्मणवादी व्यवस्था के चाकरों के मातहत रही है. वह मीरा को उत्पीड़ित किए गए पहलुओं को षड्यंत्रपूर्ण तरीके से छिपा देता है.

मीरा को परिजनों द्वारा प्रताड़ित करने का आलम ये था कि मीरा हफ्तों तक आत्मरक्षा के लिए जंगलों में छिपी रहती थी. गांववासियों द्वारा ससुराल में सूचना न देने की दया-दृष्टि पर मीरा भेष बदलकर ग्रामीणों के बीच रहती थी. मीराबाई एक विवेकशील महिला थी. वह साधारण जीवन और राजतंत्र के ध्वजवाहकों के लिए पूर्ण अध्यात्मिक दर्शन का पालन करने की हिमायती थी. लेकिन भारतीय संस्कृति में ‘आध्यात्मिकता का शासकीय गठजोड़’ कभी भी इसके लिए तैयार नहीं था.

यहां के शासकवर्ग को आध्यात्म की जरूरत अपने कुकर्मों को ढकने के लिए रहती थी और राजा और उसके हुक्मरान लालची किस्म के अध्यात्म गुरुओं को हमेशा अपने दरबार में रखने के शौकीन थे, जिसका परिणाम ये होता था कि समाज अलौकिक दुनिया के प्रवचनों के जरिए राजाओं की अय्याशी और क्रूरतम शोषण के तरीकों को समझने से महरूम रहें. भक्ति की ‘सतरंगी कल्पित दुनिया’ ने मीरा को दिमागी तौर पर अस्थिर कर दिया और अध्यात्म व शासकीय गठजोड़ से चोटिल महज 48 साल की उम्र में मीरा की मौत हो गई.

बहुत से जानकारों का मानना है कि मीरा को छल से मरवा दिया गया क्योंकि मीरा की भक्ति मार्ग का उस समय बहुत स्त्रियां अनुकरण करने लगी थी. मीरा की मृत्यु के बारे में ये भी कहा जाता है कि उसका मृत शरीर किसी को नहीं मिला. कुल मिलाकर मीरा की स्वाभाविक मृत्यु होने पर उस समय के कुलीन आध्यात्मविदों व राजपरिवार पर संदेह की सुइयां बरकरार बनी हुई हैं.

साहिर लुधियानवी का लिखा निर्गुण भक्ति धारा का गीत ‘लागा चुनरी में दाग’, मीराबाई की रचनाओं का ही प्रतिबिम्ब है. राग सिंधु भैरवी में मन्नाडे ने इसे अपनी आवाज देकर शास्त्रीय संगीत की बुलंद जगह पर स्थापित किया. हिंदी सिनेमा जगत में ऐसे बहुत गीत हैं जो मीराबाई के चरम भक्ति से प्रेरित रहे हैं. नैनों में बदरा छाए, बोले रे पपिहरा जैसे प्रसिद्ध शास्त्रीय गीत मीराबाई भक्ति रचनाओं से प्रभावित रहे हैं.

हालांकि मीराबाई की अपनी कई रचनाओं में से एक ‘ऐ री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दर्द न जाने कोय’ राग भीमपलासी का एक बहुत ही बुलंद प्रयोग रहा है. कृष्णमार्गीय निर्गुण भक्ति धारा को मीराबाई ने अपने गुरु संत रैदास के सानिध्य में बहुत ही शानदार तरीके से स्थापित किया है.

  • ए. के. ब्राईट

Read Also –

सनातन धर्म का ‘स्वर्णकाल’ दरअसल और कोई नहीं बल्कि ‘मुगलकाल’ ही था
स्वन्त्रता दिवस के उत्तर भोर में एक कविता : कुजात

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

फासिस्ट मोदी सत्ता का एजेंडा – मंदिर और सीएए

Next Post

एक हाहाकारी सत्य कथा : गब्बर वर्सेज नेहरू …

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

एक हाहाकारी सत्य कथा : गब्बर वर्सेज नेहरू ...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कम कांटें नहीं हैं भाजपा की राह में

April 13, 2018

उर्सुला

January 17, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.