संदेश रासक : कापालिकों की भी देश में कहीं इज्जत थी
संदेश रासक : कापालिकों की भी देश में कहीं इज्जत थी चंद्रभूषण हाथ में खोपड़ी लिए सड़क पर समूह में...
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Read moreDetailsफिलिस्तीनी कविता : जंग के एक बरस बाद हम हाजिर हैं... (तस्वीर : cartoonmovement.com से) जंग के एक बरस बाद...
Read moreDetailsसिंध का बंटवारा पंजाब और बंगाल से अलग है ! अनिल जनविजय सिंध को हमसे बिछड़े 75 से अधिक बरस...
Read moreDetailsआदमख़ोरों के नाम पत्र प्यारे आदमख़ोरों मत खीजो उस आदमी पर जो रेल के डिब्बे में महज़ बैठने की जगह...
Read moreDetailsराम अयोध्या सिंह संघियों और भाजपाईयों के दिलोदिमाग में सांप्रदायिकता का जहर इस कदर गहरे बैठा है कि वे बिना...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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