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व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
in गेस्ट ब्लॉग
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व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !
व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

व्लादिमीर लेनिन, सर्वहारा वर्ग के तीसरे महान शिक्षक थे, जिन्होंने रुस जैसे देश में पहली बार समाजवाद का पताका लहराया था. प्रतिक्रियावादियों के गोली के शिकार लेनिन महज 53 वर्ष की उम्र में शहीद हो गये. उनकी शहादत के बाद त्रात्स्की जैसे प्रतिक्रियावादी ने देश में एकबार फिर पूंजीवाद के दलदल में घसीटने का प्रयास किया, जिसके खिलाफ समूची पार्टी ने सर्वहारा के चौथे महान शिक्षक जोसेफ स्टालिन के नेतृत्व में त्रात्स्की और त्रात्स्कीपन्थी को हराया. बाद में त्रात्स्की सोवियत संघ से भागकर अमेरिका जा पहुंचे जहां उनकी मौत हो गई.

त्रात्स्की की मौत के बाद आज भारत में भी त्रात्स्कीपन्थी पनप गया है, जो लेनिन का ‘गुणगान’ करते हुए स्टालिन के खिलाफ अनापशनाप बोलते रहता है. अगर कभी त्रात्स्कीपन्थियों से बहस करें तो दो-चार बात के बाद ये त्रात्स्कीपन्थी गालीगलौज पर उतर आता है. दरअसल, इस तरह वह अपने दिवालियापन को ही जाहिर करता है.

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लेनिन अपने जीवन काल में ही त्रात्सकी को अच्छी तरह समझ लिये थे और उसकी मखमली खाल के नीचे छिपी नीचता को उघेड़ कर रख दिया था. नीचे लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में लेनिन के कुछ कथन दिए गए हैं – जो बाद में एक प्रतिक्रियावादी और सोवियत मातृभूमि के गद्दार बन गए.

लेनिन अपने पत्रों, टेलीग्रामों और लेखों में ट्रॉट्स्की का 219 बार अपमान किया. उन्होंने उसे क्या-क्या कहा ? ‘पुस्तोझवोन’ (अर्थात खोखली बातें करने वाला), ‘स्विन्या’ (सूअर), ‘पोडले इज़ पोडलोव’ (सबसे बुरा), ‘युदुश्का’ (यहूदा/गद्दार), ‘राजनीतिक वेश्या’ – और ट्रॉट्स्की के बारे में उनका सबसे ‘सुंदर’ वाक्यांश एक रूसी कहावत बन गया – ‘ट्रॉट्स्की की तरह झूठ बोलना.’ ‘ट्रॉट्स्की को ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या करने का बहुत शौक है… बड़े-बड़े और आडंबरपूर्ण शब्दों में, इस तरह से जो खुद ट्रॉट्स्की की प्रशंसा करे.’ (लेनिन, SW 4, पृष्ठ 194)

उद्धरण:

ट्रॉट्स्की ने मार्क्सवाद के किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर कभी कोई दृढ़ मत नहीं रखा. वे हमेशा मतभेदों का फायदा उठाते हुए एक पक्ष से दूसरे पक्ष में चले जाते हैं. फिलहाल वे बंडिस्टों और लिक्विडेटर्स के साथ हैं. और ये सज्जन पार्टी के मामलों में किसी भी नियम-कानून का पालन नहीं करते.

(लेनिन, संकलित रचनाएं, खंड 20, पृष्ठ 448, 1914)

उद्धरण :

ट्रॉट्स्की एक घिनौने अवसरवादी और गुटबाज़ की तरह व्यवहार करता है… या तो संपादकीय मंडल में समानता, केंद्रीय समिति के अधीनता, और ट्रॉट्स्की के अलावा किसी और को पेरिस न भेजना – या इस धोखेबाज़ से नाता तोड़कर उसे सार्वजनिक रूप से बेनकाब करना. वह व्यक्तिगत रूप से पार्टी के प्रति वफादारी दिखाता है, लेकिन उसका व्यवहार अन्य सभी गुटबाज़ों से भी बदतर है. (संग्रहित रचनाएं, खंड 34, पृष्ठ 400)

उद्धरण:

अपने प्रस्ताव के पहले ही शब्दों में, ट्रॉट्स्की ने सबसे खराब प्रकार के ‘समझौते’ की भावना को व्यक्त किया – एक झूठा समझौता जो सिद्धांत या विचारधारा के सवालों से नहीं, बल्कि व्यक्तियों से संबंधित है.

यहीं पर सच्चे पक्षपात और ट्रॉट्स्की और उनकी पार्टी के ‘समझौते’ के बीच बड़ा अंतर निहित है – जबकि सच्चा पक्षपात पार्टी से विघटनवाद और ओत्सोववाद को खत्म करने की कोशिश करता है, ट्रॉट्स्की का समझौता वास्तव में इन दोनों की सबसे ईमानदारी से सेवा करता है और इसलिए अधिक खतरनाक है.

(नोट्स ऑफ ए पब्लिसिस्ट, खंड 16, जून 1910, पृष्ठ 211)

उद्धरण :

बोल्शेविकों और मेन्शेविकों के बीच का संघर्ष मूल रूप से इस बारे में था कि उदारवादियों का समर्थन किया जाए या उनके प्रभाव को उखाड़ फेंका जाए.

ट्रॉट्स्की ने बोल्शेविज़्म को विकृत कर दिया क्योंकि उन्होंने रूसी बुर्जुआ क्रांति में सर्वहारा वर्ग की भूमिका की स्पष्ट समझ कभी विकसित नहीं की.

इसलिए, जब ट्रॉट्स्की जर्मन साथियों से कहते हैं कि वह ‘पार्टी की सामान्य प्रवृत्ति’ का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो मुझे यह कहने के लिए विवश होना पड़ता है – वह केवल अपने समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं.

(संकलित रचनाएं, खंड 16)

उद्धरण:

यह एक प्रकार का वैचारिक साहसिक कार्य है. ट्रॉट्स्की मार्क्सवाद के सभी शत्रुओं को एकजुट करता है… भ्रम और फूट के इस दौर में ट्रॉट्स्की के लिए ‘समय का नायक’ बनना आसान है. लेकिन यह प्रयास जितना अधिक सार्वजनिक होगा, उसकी हार उतनी ही भयावह होगी.

(खंड 17, दिसंबर 1910)

उद्धरण:

ट्रॉट्स्की से ठोस आधार पर बहस करना असंभव है, क्योंकि उनकी कोई निश्चित राय नहीं है. वे दोनों पक्षों की गलतियों को छुपाते हैं – इसलिए उन्हें बेनकाब करना ही एकमात्र उपाय है.

(खंड 17)

उद्धरण:

‘प्रावदा’ के खिलाफ ट्रॉट्स्की का घिनौना दुष्प्रचार झूठ और मानहानि से भरा है… यह षड्यंत्रकारी और संहारक हर जगह झूठ बोलता है.

(खंड 35)

उद्धरण:

पार्टी के विघटनकर्ताओं और ट्रॉट्स्कीवादियों ने पार्टी के संकल्प को तोड़ दिया है… वे सबसे बड़ी विभाजनकारी शक्ति हैं.

(खंड 20)

उद्धरण:

ट्रॉट्स्की को ऐतिहासिक घटनाओं को भव्य भाषा में समझाना पसंद है… वह अपने विचारों से असहमत श्रमिकों को ‘राजनीतिक भ्रम’ में बताता है, जबकि स्वयं को सही मानता है.

जब मैं इस तरह के लेख पढ़ता हूं, तो मेरे मन में यह सवाल उठता है – क्या ये किसी पागलखाने से आ रहे हैं ?

(खंड 20)

उद्धरण:

सरल बुद्धि वाला ट्रॉट्स्की दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक है. वह कोई सबूत नहीं दे सकता, वह केवल ‘निजी बातचीत’ यानी अफवाहों पर निर्भर रहता है.

ट्रॉट्स्की ने किसी भी महत्वपूर्ण प्रश्न पर कभी कोई निश्चित राय नहीं बनाई.

(खंड 20)

उद्धरण:

यह ट्रॉट्स्की कितना घिनौना आदमी है—बातें तो वामपंथी हैं, लेकिन उसका गठबंधन दक्षिणपंथियों से है ! उसे सार्वजनिक रूप से बेनकाब किया जाना चाहिए.

(खंड 35)

उद्धरण:

ट्रॉट्स्की हमेशा अपने स्वभाव के अनुसार ही व्यवहार करता है – बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, धोखा देना, वामपंथी होने का दिखावा करते हुए दक्षिणपंथियों की मदद करना.

(खंड 35)

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