पोस्टमार्टम
करंज के पेड़ों से लटके हुए शव हैं या अज्ञातवास में जीते पांडवों के हथियार पौरुष जब परिस्थितियों का स्वैच्छिक...
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Read moreDetailsनागार्जुन के जन्मदिन पर : हरिजन गाथा (एक) ऐसा तो कभी नहीं हुआ था ! महसूस करने लगीं वे एक...
Read moreDetailsनेशन फर्स्ट, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र के लिए बलिदान आदि शब्दों पर फिसलता हुआ देश गैंगस्टर कैपिटलिज्म में जा गिरा हेमन्त कुमार...
Read moreDetailsस्वामी सहजानंद सरस्वती की आत्मकथा 'मेरा जीवन संघर्ष' उनके जीवनकाल में क्यों प्रकाशित न हो सका ? कैलाश चंद्र झा,...
Read moreDetailsअदिति... धीरे धीरे मेरी बांई आंख की रोशनी जा रही है मेरी वामा अब दक्षिणावर्त है सूर्य के उत्तरायण होने...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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