हल्कू भैया ! अब हो कैसे ?
हल्कू भैया! अब हो कैसे ? मुन्नी कैसी ? जबरा कैसा ? और खेत पर पहरा कैसा ? हल्कू भैया!...
Read moreDetailsहल्कू भैया! अब हो कैसे ? मुन्नी कैसी ? जबरा कैसा ? और खेत पर पहरा कैसा ? हल्कू भैया!...
Read moreDetailsमुग़ल सम्राट अकबर की श्रीराम निष्ठा आज तक के भारतीय इतिहास के सभी शासकों और राष्ट्र प्रमुखों से विशेष रही...
Read moreDetailsअल्बर्ट पिंटो बोलता है तो खूब बोलता है झूठ सच जो बोलना हो बेधड़क बोलता है झूठ तो कुछ इस...
Read moreDetailsबिन पायल भी तुम्हारे पैर कितने सुघड़ लग रहे हैं इन पैरों में थोड़ी-थोड़ी धूल लगी हुई है धूल से...
Read moreDetailsबच्चे भूख से मरते हैं बच्चे बिमारी से मरते हैं बच्चे कभी सांप या बिच्छू के काटने से मरते हैं...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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