विदाई बेला
कुछ सूखे पत्ते बचे हैं इस सूखे हुए दरख़्त पर इसके पहले कि वे उड़ जाएं आंधियों में चलो चुन...
Read moreDetailsकुछ सूखे पत्ते बचे हैं इस सूखे हुए दरख़्त पर इसके पहले कि वे उड़ जाएं आंधियों में चलो चुन...
Read moreDetails‘अगर विदेशी सरकार की जगह स्वदेशी सरकार ले ले और साथ ही निहित स्वार्थी को बरकरार रखे तो वह आजादी...
Read moreDetailsसावधान ! संघी गुंडे मोदी की अगुवाई में भारत को एक बार फिर हजारों साल की गुलामी में ले जा...
Read moreDetailsवाह, क्या बात है ! कितने परिवर्तनकामी हैं हम ! बदलना चाहते हैं देश को और इस समाज को भी,...
Read moreDetailsमेरे हाथ पैर नाक नक़्श बदन और दिमाग़ बिल्कुल तुम्हारे जैसे हैं लेकिन मेरी थाली अलग है एक दिन तुम्हारी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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