अगर मैं जंगल में नहीं होता…
अगर मैं जंगल में नहीं होता तो किसी जेल में होता मुझे आज जंगल और जेल में से किसी एक...
Read moreDetailsअगर मैं जंगल में नहीं होता तो किसी जेल में होता मुझे आज जंगल और जेल में से किसी एक...
Read moreDetailsकोख में बेटियां ही नहीं मारी जाती 'कोख' में कविताएं भी मारी जाती हैं कुछ बेटियां कोख के बाहर भी...
Read moreDetailsकैमूर बाघ अभ्यारण्य के नाम पर जल-जंगल-जमीन को लूटने की साजिश के खिलाफ प्रतिरोध करने पर साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं...
Read moreDetailsजगदीश्वर चतुर्वेदी मैं आठ वर्ष से अधिक तक चार महाविद्यालयों में पढ़ा चुका हूं. कम्बख्त तनख्वाह ने ऐसा मारा कि...
Read moreDetails1 जब इस छोर से आवाज़ दे रहा हो कोई और दूसरे छोर पर मुर्दा ख़ामोशी हो तो समझ आता...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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