पूंजीवाद के अंत की कहानी, एक मजदूर की जुबानी
हम सबके लिए बुनियादी मार्क्सवाद को समझना बहुत जरूरी है ताकि हम सब कार्ल-मार्क्स द्वारा दिखाए इन्कलाब या क्रांति के...
Read moreDetailsहम सबके लिए बुनियादी मार्क्सवाद को समझना बहुत जरूरी है ताकि हम सब कार्ल-मार्क्स द्वारा दिखाए इन्कलाब या क्रांति के...
Read moreDetails1 तुमने कभी चौपायों के खुरदुरे खुर से किसी हरी पगडंडी को धूसर नहीं होते हुए पाया होगा जैसे वे...
Read moreDetailsहिमांशु कुमार दो-तीन दिन पहले एक सज्जन से बातचीत हो रही थी. वे कहने लगे वैसे मैं मोदी समर्थक नहीं...
Read moreDetailsराष्ट्र भक्त बनने के लिए आपको देश के एक काल्पनिक चित्र पर गर्व करना है सेना की जय बोलनी है...
Read moreDetailsरक्षा बंधन के दिन, 11 अगस्त, 2022, मज़दूर बस्ती, आज़ाद नगर में रहने वाली ग़रीब, दलित, विधवा महिला की 11...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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