ब्राह्मणवाद
उन्हें कभी नहीं सताता पराजय का बोध वे हमेशा विजेताओं की जय बोलते हैं अखंड होता है उनका विश्वास कि...
Read moreDetailsउन्हें कभी नहीं सताता पराजय का बोध वे हमेशा विजेताओं की जय बोलते हैं अखंड होता है उनका विश्वास कि...
Read moreDetailsशंबूक का कटा सिर जब भी मैंने किसी घने वृक्ष की छांव में बैठकर घड़ी भर सुस्ता लेना चाहा मेरे...
Read moreDetailsआज की दुनिया को नीतिगत तौर पर राजनेता नहीं, वैश्विक वित्तीय शक्तियां संचालित कर रही है ! हेमन्त कुमार झा,एसोसिएट...
Read moreDetailsप्रेमी फ़क़ीर होते हैं, मैं शून्य हूं... प्रेमी फ़क़ीर होते हैं. प्रेमी धन कमा नहीं सकता; कमा भी ले, तो...
Read moreDetailsयहां पर कुछ समय बिताऊंगा तुम्हारे साथ काल के इस शिला खंड पर फ़ॉसिल बन कर उभरने तक पिघलता रहूंगा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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