संभव है कि…
संभव है कि तुम्हारे द्वारा की गई हत्या के जुर्म में मुझे फांसी पर लटका दिया जाए यह भी संभव...
Read moreDetailsसंभव है कि तुम्हारे द्वारा की गई हत्या के जुर्म में मुझे फांसी पर लटका दिया जाए यह भी संभव...
Read moreDetailsकुछ अस्पतालों में मरे कुछ चलती ट्रेन के नीचे और कुछ जो खुले में थे जब तुम्हारे बमबर्षक कलाबाज़ियां खाते...
Read moreDetailsमनीष सिंह गौतम एक गरीब गुजराती था...! किसी तरह हीरों के व्यापार और एक दो बंदरगाह चलाकर रूखी सूखी खुम्बी...
Read moreDetailsजब मैं मरूंगा अपने साथ अपनी सारी प्रिय किताबों को ले जाऊंगा अपनी क़ब्र को भर दूंगा उन लोगों की...
Read moreDetailsआयेगा, तो अतीक ही ... मनीष सिंह अतीक अहमद बहुत ही सीनियर पॉलिटिशियन रहे. जन जन के नेता, और युवा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.