गढ़ेंगे हम एक दुनिया
तुम्हारे कोमल हथेलियों की छुअन अब तक स्मृति में है मेरे तेरे होंठों की तपन का अहसास है मुझे गुलाबी...
Read moreDetailsतुम्हारे कोमल हथेलियों की छुअन अब तक स्मृति में है मेरे तेरे होंठों की तपन का अहसास है मुझे गुलाबी...
Read moreDetailsसोता हुआ आदमी शोर नहीं मचाता नारे नहीं लगाता प्रतिवाद की मुठ्ठियां बांधे सड़कों पर नहीं निकलता सोता हुआ आदमी...
Read moreDetails'महाराष्ट्र भूषण' पुरस्कार की शुरुआत भी बड़ी विवादित रही है गिरीश मालवीय कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र सरकार ने नवी मुंबई...
Read moreDetailsमेरी कविता तुम्हें पाने का एक बेसुरा प्रयास भर है कहानियां बनती हैं और खो जाती हैं किरदार बनते हैं...
Read moreDetailsजनता के साथ मोदी से ज्यादा क्रुर मजाक और कोई कर भी नहीं सकता राम अयोध्या सिंह संघ और भाजपा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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