उमंग : लोककला द्वारा सामाजिक बदलाव की पहल
उमंग : लोककला द्वारा सामाजिक बदलाव की पहल राजीव रंजन आजाद, राइट्स कलेक्टिव राइट्स कलेक्टिव एक गैर सरकारी संस्था है...
Read moreDetailsउमंग : लोककला द्वारा सामाजिक बदलाव की पहल राजीव रंजन आजाद, राइट्स कलेक्टिव राइट्स कलेक्टिव एक गैर सरकारी संस्था है...
Read moreDetailsअडानी ग्रुप में नौकरी करने वालो की संख्या मात्र 23 हज़ार से कुछ ज्यादा है जबकि अडानी ग्रुप के मालिक...
Read moreDetailsजीतेगा तो वही जिसमें क्लियर्टी हो जो क्लीयर नहीं है जीतेगा भी तो उसे खो देगा बहुत जल्दी मोहन भागवत...
Read moreDetails1976 में भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे....
Read moreDetailsदलाल (ब्रोकर) को मैं मानव जाति का सदस्य नहीं मानता ! - बाल्ज़ाक 'दलाल (ब्रोकर) को मैं मानव जाति का...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.