लोक और तंत्र
दस हज़ार का कर्ज़किसान सेआत्महत्या करवाता है एक हज़ार रुपए का कर्ज़आदिवासी कापरिवार बिकवाता है दस हज़ार करोड़और उससे अधिक...
Read moreDetailsदस हज़ार का कर्ज़किसान सेआत्महत्या करवाता है एक हज़ार रुपए का कर्ज़आदिवासी कापरिवार बिकवाता है दस हज़ार करोड़और उससे अधिक...
Read moreDetailsसुब्रतो चटर्जी ट्रेजेडी को परिभाषित करते हुए अरस्तू ने कहा था कि ट्रैजिक हीरो में एक ट्रैजिक फ्लॉ या चरित्रगत...
Read moreDetailsशाम का ख़ाली कनस्तर पैर पटकता है सड़क पर एक ज़िद्दी बच्चा मचल गया है मेला देखने को उसे नहीं...
Read moreDetailsएक दिन पीले पड़ते पत्तों ने कोंपलों से कहा, हमारे विदा लेने के दिन आ रहे हैं तुमलोग जब हरियाओगे...
Read moreDetailsअडानी अन्तर्राष्ट्रीय ड्रग माफिया है ! 2014 में झूठ बोलकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाले लाशों के सौदागरों...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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