‘जॉन रीड, तीसरे इंटरनेशनल के प्रतिनिधि, 1920’ : एक जीवनी
महान कृति ‘दस दिन जब दुनिया हिल उठी’ के लेखक जॉन रीड की जीवनी पहला अमरीकी नगर, जहां मजदूरों ने...
Read moreDetailsमहान कृति ‘दस दिन जब दुनिया हिल उठी’ के लेखक जॉन रीड की जीवनी पहला अमरीकी नगर, जहां मजदूरों ने...
Read moreDetailsये बादशा का हुक्म है तुम्हारी अर्थियां उठें मगर ये ध्यान में रहे कि मेरे लिये जो है सजी वो...
Read moreDetailsमैट्रो में सीट हथियाने में कामयाब एक सज्जन भरी भीड़ में अपने मोबाइल पर जोर-शोर से माता की भेंटे सुन...
Read moreDetailsपलायन कभी सोचता हूं रूक कर इन घरों के बारे में कहां चले जाते हैं लोग ? इन घरों से...
Read moreDetailsभगत सिंह को याद करते हुए उनकी शहादत के बाद प्रख्यात साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी ने यह लेख लिखा था. यह...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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