कहां तक समझी पारोमिता
उधड़े आख़िरश जाना ही पड़ा उसके घर तक मन तो नहीं था लेकिन पांव ले गये मन आदतें नहीं पालता...
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Read moreDetailsरविश कुमार प्रधानमंत्री जी, बैंकरों की हड़ताल की चिन्ता न करें, बैंकर भी वोट धर्म के नाम पर ही देंगे....
Read moreDetailsसूट पहन कर बैठी, कंप्यूटर पर खड़बड़ करती, ग्राहकों के पासबुक छापती, वो बैंक वाली लड़की. कभी कैश में बैठकर,...
Read moreDetailsमेघना प्रधान पुस्तक - स्त्रीवाद की सैद्धांतिकी : जेंडर विमर्श लेखिका - वी. गीता अनुवादक - ऋचा प्रकाशक - प्रकाशन...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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