जल्लाद ही चिल्लाने लगे हैं – इंकलाब जिंदाबाद
इस घने अंधेरे में शब्दों की वे उंगलियां भी नहीं हैं जिनके सहारे हम पहुंचते थे तुम तक, चौक-चौराहों तक,...
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Read moreDetailsराजीव कुमार मनोचा उत्तर वैदिक काल के ग्रंथों में जो आर्यों का अंतिम और निर्णायक विकास हुआ वहीं संस्थावद्य रुप...
Read moreDetailsराजीव कुमार मनोचा इस देश के सभी सिद्धांतवादी स्कूल घटिया हो चुके हैं. वैसे भी सिद्धांतों में बंधे लोग अक्सर...
Read moreDetailsसौ साल पहले जब दक्षिणी अमेरिका में अश्वेत लोगों की लिंचिंग हो रही थी तो ज्यादातर गोरे अमेरिकी इसके पक्ष...
Read moreDetailsहेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना तालिबान कहते रहे हैं कि वे 'धर्मसंस्थापनार्थाय' एकजुट हुए हैं. सत्ता पर काबिज़...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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