विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
नरेन भोज खाने में माहिर था. भण्डारा हो या श्राद्ध, शादी हो या मुंडन, रिसेप्शन, अन्नप्रासन - कुछ भी हो...,...
Read moreDetailsनरेन भोज खाने में माहिर था. भण्डारा हो या श्राद्ध, शादी हो या मुंडन, रिसेप्शन, अन्नप्रासन - कुछ भी हो...,...
Read moreDetailsहो सकता है कि इस कविता के आख़िर में तुम्हें कोई पूर्णविराम नहीं मिले हो सकता है कि इस कविता...
Read moreDetailsसुब्रतो चटर्जी अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की जीत क़रीब-क़रीब निश्चित है. अमरीका भाग गया है. ये वही तालिबान है जिसे अमरीका...
Read moreDetailsकनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ भारत पाक विभाजन को लेकर बहुत-सी भ्रांतियां हैं. लोगों को इतिहास की बातें...
Read moreDetailsआवाज दो रात के सघन अंधेरे में आवाज दो हमारे पास कुछ नहीं, आवाज है तुम्हारे पास कुछ नहीं, आवाज...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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