Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 15, 2021
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

नरेन भोज खाने में माहिर था. भण्डारा हो या श्राद्ध, शादी हो या मुंडन, रिसेप्शन, अन्नप्रासन – कुछ भी हो…, हर भोज में शामिल होता और दबाकर खाता.

लेकिन नरेन की एक आदत बहुत बुरी थी. जहां भी भोज खाने जाता, कोई न कोई नुक्स निकाल ही देता.

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

मसलन, पूड़ियां नरम नही थीं, मिर्च तीखी थी, चीनी के दाने थोड़े ज्यादा बड़े थे, पत्तल पूरी तरह गोल नहीं था…वगैरह वगैरह.

राज्य के राजा तीन सप्ताह के लिए कहीं युद्ध लड़ने गए थे. लड़ भिड़ कर जब वापस आये तो पता चला कि रानी प्रेग्नेंट हैं. इस उपलक्ष्य में राजा ने पूरे नगरवासियों को भोज देने का फैसला किया.

…तो अगला भोज राजा के यहां था.

भोज की खबर नरेन तक और नरेन के नुक्स निकालने वाली खबर राजा तक पहुंची.

राजा ने अपने राज्य के सर्वश्रेष्ठ कुक्स को भोजन बनाने के काम पर लगाया और सख्त हिदायत दी कि ऐसा 56 भोग बनाना कि नरेन कोई नुक्स न निकाल पाये.

कुक्स जी जान से लग गए. बड़ी मेहनत से उन्होंने 56 भोग तैयार किया.

तय समय पर भोज शुरू हुआ. नगरवासियों ने ऐसा अद्भुत भोज खाना तो दूर, चखा भी नहीं था. भोज के पश्चात सारा नगर राजा और उनके कुक्स की वाहवाही कर रहा था, सिवाय नरेन के.

लेकिन नरेन है कहां ? अभी तो यहीं भोज खा रहा था.

काफी देर ढूंढने के बाद नरेन टेंट के एक कोने में बेहोश पड़ा हुआ मिला. मुंह पर पानी के छींटे मारकर उसे उठाया गया.

खबर राजा तक पहुंची. राजा ने नरेन को बुलवाया और पूछा – ‘क्यों नरेन ! क्या हुआ ? भोजन पसन्द नहीं आया ?’

नरेन बोला – ‘भोजन तो बहुत स्वादिष्ट था महराज. एक से बढ़कर एक पकवान थे. मैं तो बस खाता ही चला गया.

राजा ने पूछा – फिर ?

नरेन ने कहा – भोजन बहुत स्वादिष्ट था महराज…

राजा – ये मैं सुन चुका हूं, आगे बोलो. तुम बेहोश क्यों हो गए थे ?

नरेन – वही तो बता रहा हूं. भोजन बहुत स्वादिष्ट था और आपको इतना भी स्वादिष्ट भोजन नहीं बनवा देना चाहिए था कि इंसान खाते खाते मर जाए !

उसी नरेन ने आज स्वतंत्र भारत के 75 साल के इतिहास में गोता लगाया है. गहराई में काफी देर रहा भी

…और देखिये क्या निकाल कर लाया है – विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस !!!

  • कपिल देव

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

संभव है

Next Post

हिन्दुत्व यानी निजीकरण की ढ़लान पर लुढ़कता देश

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

हिन्दुत्व यानी निजीकरण की ढ़लान पर लुढ़कता देश

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

माओवादियों के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर रहे कॉरपोरेट घरानों के भाड़े के कारिंदों का खूंखार चेहरा

January 27, 2025

क्या सच में ये अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं ?

June 10, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.