1917 की महान अक्टूबर क्रांति पर : संयासवाद नहीं है मार्क्सवाद
जगदीश्वर चतुर्वेदी भारत में एक तबका है, जिसका मानना है कि कम्युनिस्टों को दुनिया की किसी चीज की जरूरत नहीं...
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Read moreDetailsअन्तर्राष्ट्रीय उर्दू दिवस : नफरतों के दौर में मुहब्बत की जुबां भारत की दुनिया को जो देन हैं, उनमें से...
Read moreDetailsमाओ त्से-तुंग : जनता की लोकतांत्रिक तानाशाही पर, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की अट्ठाईसवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 1 जुलाई...
Read moreDetailsचीन में माओ त्से-तुङ ने वेश्यावृति और यौन रोगों का ख़ात्मा कैसे किया ? 1 अक्टूबर 1949 को चीन के...
Read moreDetailsBRICS सम्मेलन : कजान से क़रीब दिखने लगा है डी-डॉलराइजेशन चंद्रभूषण रूसी शहर कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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