लोकतंत्र, बाड़ ही खेत को खाने लगी
लोकतंत्र, बाड़ ही खेत को खाने लगी कनक तिवारी कभी-कभी लगता है संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू ने उद्देशिका वाले...
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Read moreDetailsसुनो स्त्रियों... सुनो स्त्रियों... पुरुषों से डरना या फिर उन्हें नकारना बंद करो उनका अपमान करना, हर पुरुष को वहशी...
Read moreDetailsआदिवासियों की समतावादी जीवन शैली और परंपरा में निकृष्ट ब्राह्मणवाद का घुसपैठ आदिवासी समाज और संस्कृति के प्रति हमारे तथाकथित...
Read moreDetails'My Name Is Selma' : यह सिर्फ़ उस यहूदी महिला की कहानी भर नहीं है… 98 साल की उम्र में...
Read moreDetailsमोदी सरकार में 'आपदा को अवसर' में बदलने वाले मोदी के गुंडा गैंग एनआईए के खिलाफ जागरूक हों ! भारत...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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