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सबसे सुखी इंसान गधा : अच्छा है याद नहीं रहता

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 10, 2020
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सबसे सुखी इंसान गधा : अच्छा है याद नहीं रहता

गुरूचरण सिंह
जनता को तो याद ही नहीं रहा 2जी का घोटाला इसीलिए उसे फ़र्क भी नहीं पड़ता कि आज वही मोदी सरकार 2G से भी कहीं आगे के 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी कर रही है

अज्ञेय ने कहा था – ‘दुनिया का सबसे सुखी इंसान गधा !’ सुखी इसलिए कि उसे कुछ याद ही नहीं रहता कि किस बात पर मालिक ने पीटा था, पीटा था भी कि नहीं !! लिहाज़ा एक ही गलती वह बार-बार दोहराता चला जाता है. अब जिसे कुछ याद ही नहीं रहता, जो एक आदत की तरह खाता है, काम करता है, पेट और शरीर की भूख मिटा कर चैन से सो जाता है, दुःख तो उसके पास फटक भी नहीं सकता. हर हाल में खुश रहता है वह, बिल्कुल इस देश की जनता की तरह. कुछ फ़र्क ही नहीं पड़ता, उसे दुनिया जहान में होता क्या है !! कुंए का मेंढक और नाली का कीड़ा भी तो इसी तरह अपनी महानता में मगन रहता है. मेंढक को कुंए से निकाल कर समुद्र में छोड़ कर देखिए, कीड़े को गंदी नाली से निकाल कर किसी अच्छी जगह पर छोड़ कर देखिए, दोनों ही जिंदा नहीं बचेंगे !!

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इस सरकार के आने के बाद जेएनयू पर बार-बार हमला होता है, कभी उसके वजूद को मिटाने के लिए, कभी हर जोर जुल्म के खिलाफ सीना तान कर खड़े हो जाने वाले छात्रों की हिम्मत तोड़ने के लिए ! लेकिन आम जनता में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता, भले ही ये बच्चे उनके पास पड़ोस के हों. 106 से ज्यादा रिटायर्ड नौकरशाह नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता पर गंभीर आपत्तियां दर्ज करते हुए एक खुला पत्र लिखते हैं लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. सबको अपनी-अपनी ही चिंता होती है, पड़ोसी मरता है तो मरे ! एक दिन जब वह खुद मुसीबत में होता है तो उसका पड़ोसी भी अगर ऐसा ही सोचता है तो क्या गलत करता है वह ?

नागरिकता संशोधन कानून की वैधता पर की गई याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होती, इस बिना पर कि पहले हिंसा रुकनी चाहिए. लेकिन हिंसा अगर प्रायोजित हो, ओट से की गई कार्रवाई हो तो क्यों होने देंगे बंद वे लोग यह हिंसा ? आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकारें अक्सर यही हत्थकंडा तो अपनाती हैं.

खैर, बात तो भूल जाने की आदत के लाभ की हो रही थी ! 2G स्पेक्ट्रम की नीलामी में हुए कथित घोटाले का ढोल पीटते हुए आई थी यह सरकार. CAG के चड्डीधारी चेयरमैन विनोद राय ने एक काल्पनिक गणना के आधार पर 1लाख 76 हजार करोड़ के महाघोटाले (उस वक़्त का बहुत बड़ा) का आरोप लगाया जिसके कारण मनमोहन सिंह की सरकार चली गई थी. कितने ही लोगों को जेल की रोटी भी तोड़नी पड़ी थी. कन्निमोई, राजा जैसे राजनेताओं सहित कई कारपोरेट हस्तियों को भी इसी काल्पनिक नुकसान का खमियाजा भुगतना पड़ा था लेकिन इसी सरकार के सत्ता में रहने के बावजूद अदालत ने मानने से ही इंकार कर दिया कि ऐसा कोई घोटाला हुआ भी था कभी !

जनता को तो याद ही नहीं रहा 2जी का घोटाला इसीलिए उसे फ़र्क भी नहीं पड़ता कि आज वही मोदी सरकार 2G से भी कहीं आगे के 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी कर रही है हालांकि पिछले 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में उसे कोई बोली लगने वाला भी नहीं मिला था, जब तक कि कीमतें बहुत कम नहीं कर दी गई ! जिओ भी शामिल था बोली लगाने वालों में. इस बार की नीलामी की खास बात यह है कि नीलामी से पहले ही
ट्रायल करने के लिए 5 जी स्पेक्ट्रम कंपनियों को मुफ्त में दिया जा रहा है, इसके पहले कभी ऐसा किए जाने की दुनिया में कोई मिसाल नहीं मिलती.

कहीं ऐसा तो नहीं कि यह नोटबंदी की तरह किसी अभूतपूर्व घोटाले का संकेत तो नहीं है ? लेकिन हमें क्या फ़र्क पड़ता है !! हमारी बला से ! जो दूसरों के साथ होगा, हमारे साथ भी होगा !

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