Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

मंदिरों में श्लोक, भजन, दानकर्ताओं के नाम उर्दू लेखन में

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 17, 2022
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मंदिरों में श्लोक, भजन, दानकर्ताओं के नाम उर्दू लेखन में
कनॉट प्लेस, नई दिल्ली का शिव मंदिर

आरएसएस की बुनियाद ही नफरत पर आधारित है. वह हर अच्छी चीजों, अच्छे विचारों और उसके प्रणेताओं से नफरत करती है. दरअसल वह जिस मनुस्मृति आधारित ब्राह्मणवादी समाज की स्थापना करना चाहता है, वह नफरत पर टिका हुआ है. आज आरएसएस और उसका अनुषांगिक संगठन जब देश की सत्ता पर काबिज हो चुका है, उसने समाज के हर वर्ग के बीच नफरतों के जिस बीज को बोया था आज वह बीज वटवृक्ष बनकर लहलहा रहा है.

आरएसएस के नफरत का ब्राह्मणवादी वटवृक्ष न केवल मुसलमानों को निशाना बना रही है अपितु उसके ब्राह्मणवादी व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर मौजूद दलित, पिछड़ों, आदिवासियों, स्त्रियों को भी निशाना बना रहा है, जिसे वह शुद्र कहकर सम्बोधित करता है. मौजूदा समय में उसकी रणनीति एक-एक कर आगे बढ़ने की है, इसलिए वह अपने निशाना को मुसलमानों के खिलाफ केन्द्रित कर रखा है. ज्यों ही वह मुसलमानों को खत्म करने में सफल होगा, उसका अगला कदम शुद्र और आदिवासी होंगे.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

मंदिरों में उर्दू लेखन

आरएसएस मुसलमानों के नाम पर उर्दू को निशाना बनाता आया है. उसका मानना है कि जहां उर्दू वहां मुसलमान. आरएसएस के इसी तर्क पर चला जाये तो भारत के अनेकों ऐसे मंदिर है जहां श्लोक, भजन ही नहीं बल्कि दानदाताओं के नाम तक उर्दू में दर्ज है. विवेक शुक्ला सोशल मीडिया के अपने पेज पर लिखते हैं –

कनॉट प्लेस के शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का पूजा-अर्चना के लिए आना-जाना लगा रहता है. कुछ श्रद्धालु मंदिर के गेट पर संगमरमर के पत्थर पर लिखे शिव चालीसा को भी पढ़ रहे थे. उसके ठीक ऊपर एक पत्थर पर शिव मंदिर का इतिहास उर्दू और हिन्दी में लिखा है. दिल्ली के पांच-छह दशक पहले बने मंदिरों में उर्दू भी दिखाई देती है. उर्दू में श्लोक, भजन, दानकर्ताओं के नाम वगैरह लिखे होते हैं.

शिव मंदिर से दो-तीन किलोमीटर दूर मंदिर मार्ग पर है लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर), यहां पर भी उर्दू जगह-जगह दिखाई देती हैं. यहां के वाटिका क्षेत्र की दिवारों पर उर्दू में शिव पुराण और शिव चालीसा पढ़ा जा सकता है. महात्मा गांधी ने बिड़ला मंदिर का उदघाटन 12 मार्च, 1939 को इस शर्त पर किया था कि यहां पर दलितों के प्रवेश पर रोक नहीं होगी. उनकी शर्त मानी गई तो वे यहां आए. हां, वे उदघाटन के कार्यक्रम के बाद फिर कभी बिड़ला मंदिर में नहीं गए हालांकि वे इसके करीब बाल्मिकी मंदिर के एक कमरे में रहते थे. बाल्मिकी मंदिर में उर्दू देखने को नहीं मिलती.

दिल्ली-6 के नई सड़क में है रोशनपुरा. यहां पर चित्रगुप्त मंदिर है. यह प्राचीन मंदिर माना जाता है. इधर राधा की मूर्ति के नीचे इसे बनवाने वाले सज्जन बाबू शिव प्रसाद का नाम भी उर्दू में लिखा है. इस मंदिर के प्रति राजधानी के कायस्थ समाज की आस्था अटूट है. इसी में प्ले बैक सिंगर मुकेश ने भी शिवरात्रि और जन्माष्टमी में बहुत भजन गाए हैं. मुकेश का पुश्तैनी घर नई सड़क के नजदीक चहलपुरी में अब भी आबाद है.

मुकेश जिन दिनों मंदिर मार्ग के एम. बी. स्कूल में पढ़ा करते थे, वे तब बिड़ला मंदिर में भी जन्माष्टमी पर अपने मित्रों के साथ पहुंचकर अवश्य भजन सुनते-सुनाते थे. एक तरह से यहां से ही उनकी गायन की शुरूआत हुई थी. अब चलेंगे चांदनी चौक के कटरा नील में घंटेश्वर महादेव मंदिर है. यहां भी कोरोना के कारण, दो सालों के बाद शिवरात्रि मनाई गई. इधर भी उर्दू में अनेक धार्मिक इबारतें लिखी हुई हैं. अब भी कुछ बुजुर्ग इन इबारतों को देखकर कोई भजन आदि पढ़ते हुए मिल जाते हैं. पुरानी दिल्ली के खत्री कहीं चले जाएं पर वे घंटेश्वर महादेव मंदिर में मौका मिलते ही पहुंचते हैं. वे इधर आकर अपनी जड़ों से जुड़ते हैं.

कौन सा दिल्ली वाला होगा जिसने चांदनी चौक के गौरी-शंकर मंदिर के अंदर या बाहर से दर्शन ना किए हों. एक मान्यता है कि यह करीब 800 साल पुराना है. मराठा सैनिक आपा गंगाधर ने वर्ष 1761 में गौरी शंकर मंदिर के भवन का निर्माण करवाया. इधर भी दीवारों पर दानकर्ताओं के नाम और कुछ श्लोक उर्दू में लिखे मिलते हैं. गौरी और शिव की पूजा-अर्चना के लिए यहां सुबह 5 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी होती हैं.

दिल्ली को शारदीय और चैत्र नवरात्रों में कालकाजी मंदिर में जाना पसंद है. यहां इस दौरान लाखों भक्त पहुंचने लगते हैं. बेशक, ये दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक हैं. आज जिस कालकाजी मंदिर को हम देखते हैं, उसका निर्माण सन 1764 में हुआ था. इसे तब मराठा शासकों ने बनवाया था. इसका विस्तार सन 1816 में किया गया था. यहां पर देवी की मूर्ति के आसपास भी कई श्लोक और भजन उर्दू में लिखे मिलेंगे.

जिस तरह आरएसएस गिरोह देश के तमाम ऐतिहासिक इमारतों में फर्जी तरीके से गुपचुप मूर्तियों को घुसा कर या शिवलिंग नुमा किसी भी संरचना को आधार बनाकर मंदिर होने का दावा कल तोड़फोड़ कर रहा है, बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद इसका ताजा उदाहरण है, और ताजमहल को मंदिर बताने का दावा जारी है.

इसी आधार पर अगर मुसलमान भी हिन्दू मंदिरों को मस्जिद होने का दावा करने लगे तो न जाने कितने सारे मंदिरों को मस्जिद में तब्दील करना पड़ जाये क्योंकि उर्दू मुसलमानों की भाषा है और बहुतेरे मंदिरों में उर्दू भाषा का इस्तेमाल किया गया है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

मोदी मंत्र : जो जितना कमजोर है, वह उतना अधिक कर्ज चुकाएगा

Next Post

बढ़ता व्यापार घाटा यानी, मोदी सरकार की फ्लॉप ‘मेक इन इण्डिया’ नीति

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

बढ़ता व्यापार घाटा यानी, मोदी सरकार की फ्लॉप 'मेक इन इण्डिया' नीति

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नालन्दा विश्वविद्यालय

February 29, 2024

बिहार के लोग मोदी नहीं, मुद्दे को पसंद करते हैं – राजद

March 8, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.