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सोशल मीडिया ही आज की सच्ची मीडिया है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 5, 2019
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सोशल मीडिया ही आज की सच्ची मीडिया है

आज जब देश की अधिकांश मुख्यधारा की मीडिया केन्द्र की मोदी सरकार के दबाव में अथवा धन से खरीद ली गई है, उसके गुणगान में लगी हुई है. वक्त के ऐसे अंतराल में सोशल मीडिया तथा छोटे-छोटे वेबसाईट ही देश की असली मीडिया बन गई है, जहां एक नहीं करोड़ों ‘पत्रकार’ लिखते हैं, जानकारी देते हैं और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं. यही करोड़ों ‘पत्रकार’ देश की आम जनता की नित समस्याओं से लेकर राजनीति के बड़े-बड़े विश्लेषण तक कर रहे हैं. मुख्यधारा की जिस मीडिया ने सरेआम झूठ देशवासियों के सामने परोसा है, उससे आम जनता के सामने उसकी विश्वसनीयता ही संदिग्ध हो गयी है. चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या ई-मीडिया, दिन-रात उन्माद की हद तक पतित हो गये हैं.

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यही कारण है कि सोशल मीडिया और छोटे-छोटे वेबसाईट आज देश की असली मीडिया बन गई है. इंटरनेट के प्रचार-प्रसार ने पूरी दुनिया को बेहद छोटा बना दिया है, जहां किसी भी सूचना को रोक पाना किसी सरकार के बूते से बाहर की बात हो गई है. इससे भी आगे बढ़कर सोशल मीडिया तथा छोटे-छोटे वेबसाईट का जनवादी स्वरूप, जिसे विभिन्न सरकारों ने खासकर, देश की फास्स्टि मोदी सरकार ने ऐड़ी-चोटी का जोड़ लगा कर इसे नियंत्रित करने का प्रयास किया, के बावजूद इसका चरित्र खत्म नहीं हो पाया.




केन्द्र की मोदी सरकार सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए पहले अपने गुंडों को पैसे देकर बिठा रखा था, जो सिवा गाली-गलौज के और कुछ जानता ही नहीं था और अब इसे नियंत्रित करने के लिए सेवादाता कम्पनियों पर दवाब बना रही है. सोशल मीडिया तथा छोटे-छोटे वेबसाईट के जनवादी स्वरूप का ही कमाल है कि मुख्यधारा की मीडिया आज सोशल मीडिया के पीछे घिसटने के लिए मजबूर है. इतिहास और घटनाओं को तोड़ने-मड़ोड़ने के सरकारी षड्यंत्र के खिलाफ भी सोशल मीडिया ही डटकर खड़ी हुई है. इसी का एक उदाहरण हम पाठकों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसे लिखा है पूर्व मेजर जनरल रनवरी यादव ने, जिसका साहस सोशल मीडिया के वगैर मुख्यधारा की बिकाऊ मीडिया कभी नहीं कर पाती.




कई महीनों से देश भर में चर्चा थी कि मोदी हारने वाला है. चुनाव के पहले ये जरूर कुछ खेल करवाएगा. या तो मंदिर-मस्जिद पर झगड़ा करवाएगा या पाकिस्तान से युद्ध छिड़ेगा. इसलिए अब लोगों में चर्चा है कि पिछले दिनों पाकिस्तान के साथ जो कुछ भी हुआ, ये मोदी ने चुनाव जीतने के लिए खुद कराया है.

लोग पूछ रहे हैं कि मंगलवार को हुई सर्जिकल स्ट्राइक में क्या वाकई 300 लोग मरे थे ? अब कई अखबारों में छप रहा है कि वो खबर गलत थी. सेना से पूछने पर सेना ने भी उस खबर की पुष्टि करने से इंकार कर दिया. केवल भाजपा वालों के कहने पर सारे मीडिया ने झूठी खबर चलानी शुरू कर दी थी. अगर 300 लोग मारे जाते तो क्या पाकिस्तान में बबाल नहीं मचता ? हमारे देश में हमारे 40 भाई मारे गए थे तो पूरे देश का खून उबलने लगा था. हमारे 40 मारे गये, उन सबकी लाशें आयी थी, उनके 300 मारे गए, उनकी लाशें कहां गई ? उनके 300 मारे जाते तो क्या वे हमारे पायलट अभिन्दन को छोड़ते ?




इससे साफ है कि 300 लोगों को मारे जाने के बारे में भाजपा ने पूरे देश से सफेद झूठ बोला. असल में चुनाव के चलते महज दिखाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की गई. अन्तराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान का एक भी नहीं मरा. क्या हमारे 40 जवानों का यही बदला है ?

जब हमारे पायलट को पाकिस्तान ने कैद किया और हम सब गमगीन थे, उस वक्त मोदी जी अपने देश भर के कार्यकर्त्ताओं से बूथ-मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे. मोदी जी के लिए देश कुछ नहीं है, केवल वोट मायने रखते हैं.




बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा का कहना है कि – ‘अब बीजेपी को 22 सीटों का फायदा होगा. ये बात येदुरप्पा के मूंह से गलती से निकल गयी. दरअसल भाजपा के अंदर यही रणनीति चल रही है कि जवानों की लाशों पर किस तरह सीटें जीती जायें. 40 लाशों से भाजपा को 22 सीटों का फायदा हुआ तो 300 सीटों के लिए भाजपा हमारे कितने जवानों की लाशें बिछायेंगी.

पाकिस्तान ने हमारे 40 जवान मारे, बदले में हमने उनका एक नहीं मारा. हम उनके देश में घुसके खाली जमीन पे बम फोड़ आये, अगले दिन उन्होंने हमारे देश में घुस के हमारा एक लड़ाकू जहाज गिरा दिया और हमारा एक पायलट गिरफ्तार कर लिया और फिर अगले दिन पाकिस्तान ने दया करके हमारा पायलट वापस कर दिया. भारत की इस से बड़ी बेइज्जती नहीं हो सकती थी. मोदी ने पूरी दुनिया में भारत की बेइज्जती करा दी. भारत के मीडिया को मोदी जी ने पूरी तरह अपने कब्जे में कर रखा है. भारत का मीडिया 24 घंटे मोदी जी की आरती उतारता रहता है. जबकि अन्तराष्ट्रीय मीडिया में भारत की थू-थू हो रही है. बहुत दुःख हो रहा है.

https://www.youtube.com/watch?v=3-yCcXce080&feature=youtu.be





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Tags: मुख्यधारा की बिकाऊ मीडियासोशल मीडिया
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