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उत्तर कोरिया में ‘जनवादी कोरिया’ की सनगुन राजनीति (선군정치) और असहमति का अधिकार

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 14, 2023
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उत्तर कोरिया में जनवादी कोरिया की सनगुन राजनीति (선군정치) और असहमति का अधिकार
उत्तर कोरिया में जनवादी कोरिया की सनगुन राजनीति (선군정치) और असहमति का अधिकार

उत्तर कोरिया के खिलाफ पश्चिमी मीडिया के तर्ज पर भारतीय मीडिया भी गलत आरोप उछालता रहता है. इस मीडियाई खबर के अनुसार उत्तर कोरिया किम जुंग उन की तानाशाही तले दम तोड़ रही है, कि वहां बात-बात पर गोली मार दी जाती है, कि वहां के नागरिक सरकार (खासकर किम जंग उन) के भय से डरी सहमी रहती है. कि आप वहां चोरी, डकैती, हत्या, बलात्कार नहीं कर सकते. कि आप हजारों करोड़ रुपये लेकर नौ दो माल्या नहीं हो सकते.

उपरोक्त बात उन पर अक्षरशः लागू होता है जो भ्रष्टाचार करते हैं, देश की जासूसी करते हैं, धर्म के नाम पर लोग को पागल बनाते हैं और उनका भौतिक और नैतिक शोषण करते हैं. जबकि हमारे भारत जैसे देश में हत्यारे, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों को देवता बनाकर पूजा जाता है, देश की जासूसी करने वालों को, दंगाईयों, गद्दारों की मंदिरें बनाई जाती है. माल्या और जौहरियों जैसे लुटेरों को सम्मान के साथ विदेश भागने में मदद करते हैं. यही कारण है कि ऐसे असामाजिक तत्वों उत्तर कोरिया के नाम से थर थर कांपते हैं.

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उत्तर कोरिया में प्रत्येक नागरिकों को उच्चतम शिक्षा मुफ्त मिलता है, घर, जो हर भारतीय के जीवन का सपना होता है, बिल्कुल मुफ्त मिलता है, रोजगार प्रत्येक नागरिकों को सहज ही हासिल है, बीमार होने पर बेहतर से बेहतर ईलाज बिल्कुल मुफ्त और सहज है. यानी, रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा वहां के नागरिकों को प्राप्त होने की गारंटी है, जिसके लिए भारत के नागरिक अभी भी संघर्ष कर रहे हैं और अपनी जान दे रहे हैं.

उत्तर कोरिया में चोरी करने, हत्या करने, बलात्कार करने, धार्मिक पाखंडी बाबाओं का अनर्गल प्रलाप करने का अधिकार नहीं है. वहां भ्रष्टाचार करने और जासूसी करने का अधिकार नहीं है. तो स्वभाविक तौर पर चोरों, डकैतों, बलात्कारियों, धार्मिक पाखंडियों में उत्तर कोरिया को लेकर भय व्याप्त है. इसके अलावा वहां हर मानवीय संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों का सम्मान है.

दायरे में रहकर किये गए आपकी असहमति का भी सम्मान है. ‘अहसमति का सम्मान’ का अर्थ उच्छृंखलता और आवारागर्दी नहीं है. भारत में जिस तरह हर महापुरुषों को गरियाने, उसके चरित्र हनन का अधिकार है, नेहरू-गांधी, भगत सिंह को आतंकवादी, गद्दार, देशद्रोही कहने का फैशन जिस तरह संघियों ने विकसित किया है, वह न केवल निंदनीय ही है अपितु दंडनीय भी है. उत्तर कोरिया में आप यह नहीं कर सकते, जो बिल्कुल ही होना चाहिए.

यहां इस आलेख के माध्यम से हम बताना चाहते हैं कि उत्तर कोरिया में अहसमति का सम्मान किस तरह किया जाता है, जो ‘पीपुल्स कोरिया’ ब्लॉग ने अपने पेज पर प्रकाशित किया है. विदित हो कि People’s Korea ब्लॉग जनवादी कोरिया (उत्तर कोरिया) से जुड़े मिथकों और दुष्प्रचार को दूर करने और वहां की ‘समाजवादी’ व्यवस्था की उपलब्धियों के साथ साथ दक्षिण कोरिया की कड़वी सच्चाइयों को हिन्दी में सामने लाने का एक प्रयास है.

इस ब्लॉग को चलाने वाले कोरियाई भाषा के अच्छे जानकार हैं और कोरियाई प्रायद्वीप से संबंधित अध्ययन से 15 से ज्यादा सालों तक जुड़े हुए हैं. यहां यह बताना समीचीन है कि माओ त्से-तुंग की मृत्यु (1976) के बाद दुनिया में कोई भी देश समाजवादी नहीं रहा और वह, उत्तर कोरिया समेत सामाजिक साम्राज्यवाद में बदल गया है.

वाबजूद इसके उत्तर कोरिया अभी भी सामाजिक रुप से आंतरिक समाजवादी व्यवस्था को लागू किये हुए है. इसके साथ ही यह एक कड़वी हकीकत है कि अगर यूक्रेन युद्ध न हुआ होता तो उत्तर कोरिया ही अमेरिकी साम्राज्यवाद और नाटो का अगला निशाना बनता. तो आईये, हम यहां जानने की कोशिश करते हैं कि उत्तर कोरिया में असहमति का सम्मान किस तरह किया जाता है.

25 अगस्त 1960 को काॅमरेड किम जंग इल (ऊपर तस्वीर में बांऐं) ने कोरियाई पीपुल्स आर्मी (केपीए) के ऐतिहासिक सियोल रयू क्यंग सु गार्ड नंबर 105 टैंक डिवीजन का दौरा करके सनगुन (선군 , सेना सर्वप्रथम) क्रांतिकारी नेतृत्व की शुरुआत की थी. केपीए का उपरोक्त डिवीजन 28 जून 1950 को दक्षिण कोरिया के सियोल में प्रवेश करने वाला पहला डिवीजन था और इसने सियोल को अमेरिकी साम्राज्यवादी और दक्षिण कोरियाई कठपुतली औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराया गया था.

इसी डिवीजन के टैंक नंबर 312 यूनिट ने इस साल अमेरिकी साम्राज्यवादी हमलावरों के खिलाफ महान पितृभूमि मुक्ति युद्ध में जीत की 70वीं वर्षगांठ के लिए भव्य सैन्य परेड में गर्व से भाग लिया.

केपीए के सियोल रयू क्यंग सु गार्ड नंबर 105 टैंक डिवीजन का दौरा करते समय, काॅमरेड किम जंग इल ने क्रांतिकारी नारा दिया ‘आइए हम अपने जीवन के साथ कॉमरेड किम इल संग की अध्यक्षता वाली पार्टी केंद्रीय समिति की रक्षा करें !’ यह नारा इस विचार का सार था कि जनवादी कोरिया की क्रांतिकारी सशस्त्र सेना वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की क्रांतिकारी सशस्त्र सेनाएं हैं और वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (डब्ल्यूपीके) के नेतृत्व में हैं.

अक्सर जनवादी कोरिया के बाहर सनगुन राजनीति को गलत तरीके से समझा जाता है कि यह एक सैनिक सरकार के समान है या सेना द्वारा नियंत्रण देश और समाज के बारे में है, लेकिन सच्चाई कुछ और है. जनवादी कोरिया में आपको वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया का लाल झंडा सैन्य वाहनों पर शान से लहराता हुआ दिखाई देगा.

सनगुन क्रांतिकारी नेतृत्व जनवादी कोरिया के क्रांतिकारी सशस्त्र बलों पर पार्टी के नेतृत्व और मार्गदर्शन को मजबूत करने के बारे में था. काॅमरेड किम जंंग इल ने केपीए को न केवल हथियार और तकनीक में मजबूत बल्कि विचारधारा के साथ-साथ पार्टी और उसके सिद्धांतों के प्रति वफादारी में भी मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया. जैसा कि काॅमरेड किम जंग उन ने अपनी एक रचना में लिखा है –

‘सनगुन क्रांति में केपीए को सबसे महत्वपूर्ण मामलों के रूप में मजबूत करने के संबंध में, उन्होंने केपीए को हमारी क्रांति के समर्थन, मुख्य शक्ति के रूप में खड़ा किया और गंभीर साम्राज्यवाद-विरोधी, अमेरिका-विरोधी युद्ध में ऐतिहासिक जीत हासिल की. देश की सुरक्षा और समाजवाद की रक्षा और कोरियाई पीपुल्स आर्मी को वर्कर्स पार्टी के उद्देश्य के लिए और एक अजेय क्रांतिकारी सेना बनने के लिए प्रशिक्षित किया.

सनगुन क्रांतिकारी नेतृत्व 1960 के दशक से काॅमरेड किम जंग इल के भौतिक जीवन के अंत तक लगातार चला. जनवादी कोरिया की आत्म-रक्षात्मक शक्ति बढ़ती गई और बढ़ती गई. जनवादी कोरिया ने ‘प्यूब्लो’ घटना, ईसी 121 घटना और पनमुनजम घटना जैसी तीव्र अमेरिका विरोधी टकराव में जीत हासिल की. इन सभी घटनाओं ने सनगुन राजनीति और सनगुन क्रांतिकारी नेतृत्व के औचित्य और श्रेष्ठता को साबित किया.

शीत युद्ध’ वास्तव में कभी ख़त्म नहीं हुआ और 1990 के दशक के अंत में, कई समाजवादी देशों और कई तीसरी दुनिया के देशों ने नव-उपनिवेशवाद और कठपुतली शासन के माध्यम से अमेरिकी और विश्व साम्राज्यवादियों के प्रभुत्व में आकर अपनी स्वतंत्रता खो दी. अमेरिका ने हस्तक्षेप और युद्ध के माध्यम से इराक और लीबिया में साम्राज्यवाद विरोधी स्वतंत्र सरकारों को गिरा दिया. ऐसी विकट परिस्थितियों में, एक ही देश चट्टान की तरह मजबूत था और दुनिया में समाजवाद के गढ़ के रूप में खड़ा था; और वो था जनवादी कोरिया !

सनगुन क्रांतिकारी नेतृत्व के तहत जनवादी कोरिया एक समाजवादी परमाणु शक्ति और एक अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल (ICBM) शक्ति बन गया है, जो न केवल अमेरिकी साम्राज्यवादियों के आक्रमण को झेलने में बल्कि राष्ट्रीय एकीकरण के लिए एक पवित्र संग्राम छेड़ने और पुनर्मिलन लाने में भी पूरी तरह सक्षम है. काॅमरेड किम जंग इल द्वारा शुरू किए गए सनगुन क्रांतिकारी नेतृत्व के उद्देश्य को काॅमरेड किम जंग उन द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है.

तथाकथित ‘मुख्यधारा’ की तथाकथित ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ मीडिया द्वारा दुनिया के सबसे सनकी, क्रूर, निरंकुश तानाशाह जैसी संज्ञाओं से नवाजे गए किम जंग उन की तानाशाही का आलम देखिए कि उनके बगल में बैठा आदमी उनकी बात से असहमति जता रहा है.

उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी की पोलित ब्यूरो की एक बैठक में पार्टी सचिव किम जंग उन के किसी प्रस्ताव पर पांच सदस्यों ने असहमति जताई, जो उपरोक्त तस्वीर में साफ साफ दिखाई देता है और असहमति जताने वाले सदस्यों को किसी तोप से नहीं उड़ाया गया या लोगों के सामने गोली नहीं मारी गई क्योंकि उन्हें असहमत होने का अधिकार है.

इसलिए उत्तर कोरिया में किम जंग उन समेत कोई भी निरंकुश नहीं हो सकता. वहां जनता और पार्टी से कोई उपर नहीं. अगर वहां नेता की बहुत इज्जत है तो उसके जनहितैषी कामों की वजह से ही है. उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी जो कि एक कम्युनिस्ट पार्टी है, के द्वारा संचालित एक समाजवादी देश है, जिसमें जनता की तानाशाही ही चलती है.

आप जिस उत्तर कोरिया के बारे में आए दिन सुनते रहते हैं, उस उत्तर कोरिया का कोई वजूद ही नहीं है. असली उत्तर कोरिया के तीन मूलमंत्र हैं जिससे इस देश को समझ लीजिए –

  • पहला, ‘जनता ही ईश्वर है’ (The People are God 이민위천) यानि जनता सबसे उपर है.
  • दूसरा, एकनिष्ठता (Single Hearted Unity 일편단심) यानि समाजवाद की पूर्ण विजय और अंततः कम्युनिस्ट समाज की ओर बढ़ने के लिए एकनिष्ठ भावना और
  • तीसरा, आत्मनिर्भरता (Self Reliance 자력갱생) यानि बिना किसी महाशक्ति या बाहरी शक्ति पर निर्भरता के खुद के संसाधनों से अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास.

इसलिए उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिका और दक्षिण कोरिया के जहरीले प्रोपेगेंडा से सावधान रहें. किम जंग उन को वहां की पार्टी और जनता ने योग्यता के चलते चुना है, ना कि किसी के बेटे और पोते होने के कारण. और उसकी योग्यता पद संभालने के इन 10 सालों में साबित हुई है.

अगर उसने जरा-सी भी जनविरोधी नीति अपनाई तो वहां की जागरूक जनता उसे लात मारकर तुरंत भगा देगी, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है. वहां की जनता अपने सेवक को चुनती है, न कि पूंजीपतियों के दलाल को. उत्तर कोरिया का नेता अपनी जनता के सामने सारी बातें रखता है, किसी शेयर दलाल के साथ सुहागरात नहीं मनाता (ऐसी भाषा के लिए माफी चाहता हूं, पर इसे छोड़ कोई दूसरा शब्द नहीं सूझ रहा था).

https://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2023/09/videoplayback.mp4

उपरोक्त वीडियो जो 1 दिसम्बर, 2021 का है, जब वर्कर्स पार्टी की पोलित ब्यूरो की बैठक हुई और उस बैठक में किसी प्रस्ताव पर कुछ सदस्यों ने हाथ नहीं उठाकर असहमति जताई. और वहां के लोगों और खुद किम जंग उन के लिए इसमें कुछ भी असमान्य नहीं है, पर उत्तर कोरिया के खिलाफ पश्चिमी साम्राज्यवादी मीडिया के निरंतर दुष्प्रचार का शिकार होकर उसे ‘लोकतंत्र और मानवाधिकार का नरक’ समझने वाले लोगों के लिए जरुर अचंभे की बात हो सकती है.

कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि शायद हाथ न उठाने वालों का प्रस्ताव पर वोटिंग करने का अधिकार न हो. कहने को तो यह भी कहा जा सकता है कि उस बैठक में किम जंग उन का कोई हमशक्ल बैठा हुआ था, वरना असली वाला तो तोप या मिसाइल से उड़ा देता. इसके अलावा और भी कुछ मनगढ़ंत बोल लीजिए पर सच तो यही है कि उत्तर कोरिया में ‘Too Much Democracy’ है, जिसकी कल्पना मात्र से दुनिया भर के धनपशु और उनकी दलाली करने वाली सरकारें थर थर कांपती हैं.

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